पलामू के बीडीओ हत्याकांड में लापरवाही के मामले में बिहार के डीजी अरविंद पांडेय पर 23 साल बाद एक्शन


पलामू के एसपी रहे अरविंद पांडेय पर नीतीश सरकार ने कार्रवाई की है. अरविंद पांडेय फिलहाल बिहार में डीजी हैं. पलामू के मनातू प्रखंड के तत्कालीन बीडीओ की हत्या के 23 साल पुराने मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में बिहार सरकार ने अरविंद पांडेय की सैलरी व प्रमोशन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गयी है.

बिहार सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, उन्हें दो सैलरी इंक्रीमेंट का लाभ नहीं मिलेगा. मामला यहीं पर खत्म नहीं होता. अरविंद पांडेय को मिल रही वर्तमान सैलरी पर भी सरकार ने कैंची चला दी है. वर्तमान सैलरी से पिछली दो वेतन वृद्धि को भी माइनस करने का आदेश दिया गया है. इस बारे में मंगलवार की शाम गृह विभाग की तरफ से एक आदेश जारी किया गया है. अरविंद पांडेय 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. वर्तमान में वो बिहार में में सिविल डिफेंस के डायरेक्टर जनरल (डीजी) के रूप में पोस्टेड हैं.

क्या है मामला?

दरअसल, यह मामला 23 साल पुराना है. उस बिहार और झारखंड एक ही था. साल 1997 में आईपीएस अरविंद पांडेय पलामू जिले के एसपी थे. नक्सलियों ने मनातू के बीडीओ भावनाथ झा की उनके आवास में घुसकर गला रेतकर और गोली मारकर हत्या कर दी थी. आरोप है कि अरविंद पांडेय ने इस मामले में लापरवाही बरती थी. तभी से उनके खिलाफ डिपार्टमेंटल जांच चल रही थी. अब जाकर सरकार ने कार्रवाई की है. इसके लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सहमति भी सरकार ने प्राप्त कर ली है.

नक्सलियों ने घर में घुसकर कर दी थी बीडीओ की हत्या

पलामू का मनातू प्रखंड क्षेत्र वर्ष 1997 में नक्सलियों के काफी प्रभाव वाला क्षेत्र रहा था. नक्सलियों की इस इलाके में तूती बोला करती थी. पदाधिकारी और कर्मचारी मनातू प्रखंड में अपना योगदान देने से डरते थे. उस समय भवनाथ झा बतौर बीडीओ मनातू प्रखंड में कार्यरत थे. प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी (उस समय एमसीसी) ने मनातू स्थित बीडीओ के सरकारी आवास में घुसकर उनकी बेरहमी से हत्या कर दी थी.

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