बिहार चुनाव में वोट पैटर्न का तुलनात्मक विश्लेषण, मात्र 38 निर्वाचित विधायकों को मिले 50% से ज्यादा वोट

 


बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में विजेता विधायकों का वोट मार्जिन इस बार 2015 के चुनाव से कम हुआ है। 2015 के चुनाव में लालू-नीतीश का मजबूत सामाजिक गठबंधन चुनाव में था, जबकि इस बार नीतीश-भाजपा के गठजोड़ को तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन से मजबूत टक्कर मिली और चुनाव अधिक करीब का था। इस बार विधानसभा चुनाव में विजेता विधायकों को औसत 43.01 प्रतिशत वोट हासिल हुए हैं, जबकि पिछली बार उन्हें 44.10 प्रतिशत वोट मिले थे।


निर्वाचित 243 विधायकों में इस बार 38 यानी 16 प्रतिशत विधायकों ने 50 प्रतिशत या उससे अधिक वोट हासिल किया, जबकि 205 विधायकों ने 50 प्रतिशत से कम वोट प्राप्त किया। 2015 के चुनावों में विजेता विधायकों को कुल वोटरों का 25.23 प्रतिशत वोट मिला, जबकि 2015 में 25.09 प्रतिशत वोट विजेताओं को मिला था। 165 आपराधिक मामले वाले में 31 यानी 19 प्रतिशत विजेता उम्मीदवारों ने 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल किए। इसी प्रकार 196 में से 32 यानी 16 प्रतिशत ने 50 प्रतिशत या उससे अधिक वोट प्रतिशत हासिल किया।

राजद के 75 में 41 यानी 55 प्रतिशत विधायकों ने 25 प्रतिशत से कम वोट शेयर हासिल कल जीत हासिल की। जदयू के 43 में 26 यानी 60 प्रतिशत विधायकों ने 25 प्रतिशत से कम वोट हासिल की। कांग्रेस के 19 में से 12 यानी 63 प्रतिशत विधायकों ने 25 से कम वोट शेयर प्राप्त कर जीत हासिल की। सीपीआइ-एमएल के 12 में तीन यानी 25 प्रतिशत विधायकों ने 25 प्रतिशत से कम वोट शेयर हासिल किया। इस चुनाव में तीन विधायकों ने 200 से कम मतों से जीत हासिल की, जबकि दो विधायकों ने 30 प्रतिशत से अधिक के अंतर से जीत प्राप्त की।

चुनाव में 165 में 58 आपराधिक मामले घोषित करने वाले विधायकों ने साफ छवि वाले उपविजेताओं पर जीत हासिल की। इन 58 में से आठ विधायकों ने 20 प्रतिशत से अधिक के अंतर से जीत प्राप्त की। 196 में 42 करोड़पति विधायकों ने गैर करोड़पति उम्मीदवारों पर जीत हासिल की है। इन 42 में पांच विधायकों ने 20 प्रतिशत से अधिक के मार्जिन से जीत प्राप्त की है। इनमें से औराई से भाजपा के राम सूरत कुमार ने 28 प्रतिशत के अंतर से जीत प्राप्त की।

पुनः निर्वाचित हुए 96 विधायकों में से किसी ने भी अपने निर्वाचन क्षेत्र में 30 प्रतिशत से कम वोट शेयर नहीं हासिल किया है। इस तरह इनका प्रदर्शन बेहतर है। इनमें से 12 यानी 13 प्रतिशत विधायकों ने 50 प्रतिशत से अधिक वोट प्राप्त किया है। 23 पुनः निर्वाचित विधायकों ने पांच प्रतिशत से कम वोट अंतर से जीत प्राप्त की है।


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