विधानसभा की 7 समितियां भगवा पार्टी के नाम, नंदकिशोर-प्रेम कुमार भी नहीं बनेंगे मंत्री

 

बिहार में मंत्रिपरिषद गठन के बाद एक अहम फैसला हुआ, जिसने नीतीश सरकार में भाजपा का कद बढ़ा दिया है। दरअसल, विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने विधानसभा की समितियों का फैसला सुना दिया है। इसके तहत भाजपा के खाते में सात समितियां आई हैं, जबकि राजद के पास छह और जदयू को पांच समितियां सौंपी गई है। इसके अलावा कांग्रेस के पास दो और हम व वामदल के पास एक-एक समिति है। समितियों में 11 पूर्व मंत्रियों के नाम भी तय कर दिए गए हैं।

तेज प्रताप को मिला यह पद
बता दें कि बिहार विधानसभा में भाजपा के पास सभापति का पद पहले से है। पिछले 10 दिन से इन समितियों के लिए भाजपा के स्पीकर विजय कुमार सिन्हा और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के बीच पत्राचार चल रहा था। अब इसका नतीजा सामने आ गया है। दरअसल, राजद को मिलीं छह समितियों में से एक का सभापति लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को बनाया गया है।

ये नेता नहीं बनेंगे मंत्री
गौरतलब है कि विधानसभा की समितियों में जिन नामों को लिया गया, उससे यह तय हो गया कि उन नेताओं को अगले मंत्रिमंडल के विस्तार में नहीं रखा जाएगा। भाजपा ने पूर्व मंत्री नंदकिशोर यादव, डॉ. प्रेम कुमार, रामनारायण मंडल, कृष्ण कुमार ऋषि, विनोद नारायण झा और राम प्रवेश राय को समितियों का सभापति बनाकर उनके लिए मंत्रिमंडल का दरवाजा बंद कर दिया। वहीं, जदयू ने ऐसे 5 नेताओं नरेंद्र नारायण यादव, हरिनारायण सिंह, दामोदर रावत, अमरेंद्र कुमार पांडे और शशि भूषण हजारी के लिए मंत्रिमंडल का दरवाजा बंद कर दिया है।

नेताओं को मिली यह जिम्मेदारी
जानकारी के मुताबिक, विधानसभा में समितियों की जिम्मेदारी उन नेताओं को दी जाती है, जो गंभीरता के साथ अपने पद का निर्वहन करते हैं। अमूमन लोक लेखा समिति की जिम्मेदारी विपक्ष के पास रहती है। इस बार राजद के सुरेंद्र प्रसाद यादव को इस समिति का सभापति बनाया गया है। वहीं, लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को गैर सरकारी विधेयक एवं संकल्प का सभापति नियुक्त किया गया है। जदयू के बाहुबली विधायक अमरेंद्र कुमार पांडे को प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण समिति का सभापति बनाया गया है।

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