लालू की वजह से राज्यसभा जा रहे हैं सुशील कुमार मोदी, पढिये इनसाइड स्टोरी!


पूर्व केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान के निधन के बाद राज्यसभा के लिये खाली हुई एक सीट पर हो रहे उपचुनाव में एक मात्र निर्दलीय उम्मीदवार श्याम नंदन प्रसाद का नामांकन रद्द हो गया है, अब एनडीए की ओर से सुशील कुमार मोदी का राज्यसभा जाना लगभग फाइनल है, जाहिर है कि अब छोटे मोदी की बिहार की राजनीति से दूर केन्द्र की राजनीति में एंट्री होने वाली है, यानी बीजेपी में उनके साइडलाइन होने की खबरों पर भी पूर्ण विराम लग चुका है, लेकिन बिहार के डिप्टी सीएम पद से बेदखल किये गये सुशील मोदी की किस्मत कैसे खुली, ये भी अब राज की बात नहीं रहा, दरअसल इसे लेकर सियासी गलियारों में चर्चा है कि लालू यादव की वजह से सुशील मोदी को राज्यसभा का टिकट मिला है, और उनकी जीत सुनिश्चित की गई है।

रणनीति का हिस्सा
जी हां, ये चौंकाने वाली बात है, लेकिन सच भी है, दरअसल नई सरकार के गठन के समय सबसे बड़ा टास्क बहुमत परीक्षण से गुजरना तथा उसमें पास होना ही था, इस दौरान जैसे ही सुशील मोदी ने लालू के खिलाफ माहौल बनाकर पार्टी को अपने कद का एहसास कराया, जो कि उनकी रणनीति का ही हिस्सा थी। सूत्रों के मुताबिक केन्द्र की राजनीति में जाने को लेकर सुमो को लेकर कुछ पक्का नहीं था, लेकिन जिस तरह लालू यादव के कथित मामले को मीडिया में आकर उजागर किया, इससे वो बीजेपी को एक झटके में समझा गये, कि सुमो का बिहार में कोई विकल्प नहीं है, जाहिर है कि इस प्रकरण के बाद बीजेपी की ओर से राज्यसभा में बाकी नाम कट गये और उनका नाम फाइनल हो गया।

पहले भी साइड करने की कोशिश
ऐसा नहीं है कि बिहार बीजेपी में सुशील मोदी को पहली बार किनारे लगाने की कोशिश की गई थी, इससे पहले 2008 में जब नीतीश कुमार ने मंत्रिमंडल में फेरबदल किया था, तो चंद्रमोहन राय को मंत्री पद छोड़ना पड़ा था, जिसके बाद चंद्रमोहन राय का सरकार में कद कम कर दिया था, इस पूरे मामले का दोष सुशील मोदी के सिर पर आया था।

सुमो हटाओ अभियान
इस प्रकरण के बाद बिहार बीजेपी का एक खेमा सुशील मोदी हटाओ अभियान से जुड़ गया था, तब डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी दिल्ली पहुंच गये, उन्हें मामले में सफाई देनी पड़ी थी, जिसके बाद मौका मिलती ही पीठ पीछे उन्हें साइडलाइन करने की कई बार कोशिश की गई, इस बार भी ऐसा लग रहा था कि वो किनारे हो जाएंगे, लेकिन लालू के कथित तौर पर जेल से किये गये फोन कॉल ने सुशीम मोदी के किस्मत को फिर से खोल दिया है।

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