इस बार नहीं होगा संसद का शीतकालीन सत्र, जानें क्यों लेना पड़ा सरकार को यह फैसला

नई दिल्ली। कोरोना संकट के बीच किसानों का प्रदर्शन सभी स्वस्थ्य नियमों की हवा निकालकर रख दिया है। जबकि कोरोना वायरस का कहर पूरी दुनिया भुगत रही है। भारत में भी सं​क्रमितों का आंकड़ा एक करोड़ को छूने लगा है। इन सबके बीच इस बार संसद का शीतकालीन सत्र नहीं बुलाया जाएगा। सरकार ने कोविड—19 के खतरों को देखते हुए इस बार संसद का शीतकालीन सत्र का आयोजन नहीं कराए जाने का एलान किया है। जबकि किसानों के मुद्दों पर हाल ही में कांग्रेस की तरफ से सत्र बुलाने की मांग की गई थी। वहीं विपक्ष के कई अन्य दल भी सत्र बुलाए जाने की मांग कर रहे थे। लेकिन संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि सभी पक्ष सत्र को स्थगित करने पर सहमत हैं।

उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए शीतकालीन सत्र बुलाए जाने के पक्ष में कोई नहीं था। ऐसे में सब ठीक—ठाक रहा तो जनवरी में सीधे बजट सत्र बुलाया जाएगा। बता दें प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की एक चिट्ठी का जवाब दिया है। इस पत्र में अधीर रंजन चौधरी की तरफ से एक सत्र चलाने की मांग की गई थी। इसमें देश में हो रहे बड़े पैमाने किसानों के प्रदर्शनों को लेकर नए कृषि कानूनों पर चर्चा करने की मांग की गई थी। इसी पत्र के जवाब में जोशी ने कहा कि इस पर सभी दलों के नेताओं के साथ विचार-विमर्श किया था और सर्वसम्मति से कोविड-19 के कारण सत्र न बुलाए जाने पर सभी सहमति जताई है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार की तरफ से लाए गए नए कृषि कानूनों के विरोध में कई किसान संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों नए कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग पर अड़े हुए हैं। इसी के विरोध में पंजाब—हरियाणा सहित देश के अन्य हिस्सों से आए किसान दिल्ली बॉर्डर पर बीते 20 दिनों से डेरा जमाए हुए है। वहीं दूसरी तरफ न केंद्र सरकार किसानों से सुझाव मांगे हैं, जिससे इस कानून में संशोधन किया जा सके। लेकिन किसान किसी भी संशोधन को मानने को अब तैयार नहीं हैं, उनकी मांग कानून को वापस लेने की है। जबकि केंद्र सरकार भी संशोधन के सिवाए अब पीछे हटने को तैयार नहीं है। कांग्रेस सहित अन्य दल किसानों के इस आंदोलन को भुनाने के प्रयास में लगे हुए हैं और कांग्रेस—आम आदमी पार्टी की तरफ से भी प्रदर्शन किया जा रहा है।

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