Farmers Protest: मध्य प्रदेश में नहीं दिखेगा भारत बंद का असर, ये है बड़ा कारण


भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। 
पूरे देश में किसान आंदोलन (Farmers Protest) की आग फ़ैल गई है। एक तरफ जहां कृषि बिल (Agricultural bill) के विरोध में किसानों (farmers) ने 8 दिसंबर को भारत बंद (bharat band) का ऐलान किया है। वहीं दूसरी तरफ मध्यप्रदेश (madhya pradesh) में इस बन्दी का कोई खास असर नहीं देखने को मिलेगा। राजधानी सहित प्रदेश भर में मंडी संचालित होगी और बाजार भी बंद नहीं किए जाएंगे।

दरअसल मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन या भारत बंदी का असर कम ही देखने को मिलेगा। मध्य प्रदेश के किसी व्यापारी संगठन (Merchant organization) ने बंद का समर्थन किया है। हालांकि उन्होंने कृषि बिल में संशोधन की मांग अवश्य की है। व्यापारी संगठनों का कहना है कि कृषि कानून बिल में कुछ ऐसे प्रावधान है जो मंडी और किसानों की जिंदगी के लिए आगे चलकर हानिकारक हो सकते हैं। इसलिए इसमें संशोधन की आवश्यकता है।

इसके साथ ही व्यापारी संगठनों का कहना है कि मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन या मंडी बंद एवं भारत बंद को लेकर कोई चर्चा नहीं की गई है। इस मामले में गल्ला मंडी एसोसिएशन द्वारा कहा गया है कि मंडी बंद नहीं रहेगी लेकिन किसानों की मांग और किसान आंदोलन का हम समर्थन करते रहेंगे। कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि मंडी को बंद रखने से कम से कम 72 घंटे पहले सूचना देनी होती है और ऐसा नहीं किया गया है। इसलिए अगर मंडे को बंद किया गया तो किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

इसके साथ ही व्यापारी संगठनों की मांग है कि हालांकि मध्यप्रदेश में मंडी को बंद नहीं रखा जाएगा लेकिन कृषि बिल में संशोधन की आवश्यकता है। कृषि बिल के नियम एक समान रखी जाए। इसके साथ ही कृषि बिल में किसानों की सुरक्षा की गारंटी होनी चाहिए। टैक्स जैसे मुद्दे समान होनी चाहिए। वही व्यापारी संघ द्वारा कहा गया कि अभी भारत बंद के मामले में कोई विचार-विमर्श नहीं किया गया है। अगर कोई संगठन हमसे संपर्क करता है तो इस मुद्दे पर विचार-विमर्श किया जाएगा उस पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

हालांकि किसान संगठन ने दिल्ली की तरह भोपाल में किसान आंदोलन और भारत बंद का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि वह भोपाल के नीलम पार्क में धरने पर बैठेंगे और जब तक दिल्ली में किसान रहेंगे। तब तक भोपाल में वह किसान आंदोलन का साथ देने के लिए भारत बंद में उनके साथ रहेंगे। वही किसान संगठनों की मांग है कि कृषि कानून को वापस लिया जाए। इसके साथ ही किसान संगठन ने कहा है कि अभी तक इस मामले में किसी एसोसिएशन ने उनसे संपर्क साधने की कोशिश नहीं की है लेकिन अगर कोई उनके साथ कोई आना चाहता है तो उसका स्वागत करते हैं।

बता दे कि केंद्र सरकार के किसी कानून बिल को लेकर पंजाब, हरियाणा सहित यूपी, दिल्ली में किसान विरोध पर बैठे हैं। जहां उन्होंने किसान आंदोलन शुरू कर दिया है। इसके साथ ही 8 दिसंबर को उन्होंने भारत बंद का ऐलान किया है। किसानों की मांग है कि कृषि कानून बिल को वापस लिया जाए। किसानों का कहना है कि इस बिल से सिर्फ उद्योगपतियों को फायदा होगा। वही किसानों की जिंदगी तबाह हो जाएगी। साथ ही किसानों का यह भी कहना है कि इस नए बिल से किसान अपने माल को पूरे भारत में बेचने के लिए स्वतंत्र नहीं होगा और वह बंधकर रह जाएगा।

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