संयुक्त राष्ट्र का दावा- ‘साल 2021 में भारतीय अर्थव्यवस्था पकड़ेगी रफ्तार’

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संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अगला साल बहुत बेहतर होने वाला है। कोरोना के कारण आर्थिक गतिविधियों पर लगे विराम से दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को उभरने में समय लगेगा लेकिन UN की माने तो “भारतीय अर्थव्यवस्था एक बेहतर वर्ष  की ओर अग्रसर है।”

रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण एवं दक्षिण पूर्वी एशिया में 2019 में हुए कुल विदेशी निवेश का 77 प्रतिशत, 51 बिलियन डॉलर अकेले भारत में निवेश किया गया था। इसमें से अधिकांश निवेश सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी ‘IT’ एवं उसके सहयोगी क्षेत्र में हुआ है। इसके पीछे, भारत में तेजी से बढ़ता डिजिटल इकोसिस्टम और ई कॉमर्स का चलन, मुख्य वजह रही है जिसमे कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों को भारतीय बाजार की ओर आकर्षित किया है।

हालांकि, रिपोर्ट बताती है कि कोरोना के फैलाव के बाद 2020 के शुरुआत में भारत में निवेश की दर घटी लेकिम फिर भी भारत का तेजी से बढ़ती टेलीकॉम और डिजिटल सेक्टर विदेशी निवेश को आकर्षित किये हुए है। TFIpost ने पहले भी अपनी एक रिपोर्ट बताया था की भारत में निवेश बढ़ रहा है। साथ ही मोदी सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे PLI योजना तथा भारत में IT कंपनियों की बढ़ती तादाद, भारतीय अर्थव्यवस्था के सुनहरे भविष्य की ओर संकेत कर रहे हैं।

सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इसी काल में CCP की नीतियों के चलते चीन की अर्थव्यवस्था कई समस्याओं से जूझ रही है। चीन में सरकार पर कर्ज बढ़ता जा रहा है तथा छोटे निवेशकों के पैसे डूबने वाले हैं। इतना ही नहीं चीन की नीतियों के कारण, उसकी छवि स्वतंत्रता एवं लोकतंत्र विरोधी शक्ति की बनी है जिसके चलते जापान से लेकर यूरोपियन यूनियन तक, कोई भी उसके साथ व्यापारिक समझौते करने को तैयार नहीं है।

ऐसे में स्पष्ट है कि भारत का बड़ा बाजार और तेजी से बढ़ रहा कुशल श्रम विदेशी निवेशकों को आकर्षित करेगा। इसके अलावा भारत में केंद्र से लेकर राज्य के स्तर तक सरकारें निवेशकों को आकर्षित करने के लिए प्रयास कर रही हैं। हमने पहले एक रिपोर्ट में बताया था कि वैश्विक वित्तीय विश्लेषक संस्था ‘Nomura’ के अनुसार 2021 में भारत चीन (9 प्रतिशत) एवं सिंगापुर(7.5 प्रतिशत) की आर्थिक विकास दर से भी अधिक तेजी से (9.9 प्रतिशत) विकास करेगा।

इतना ही नहीं, IMF और वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक 2020 की रिपोर्ट में भी यह बताया गया था कि भारत 8.8 प्रतिशत की विकास दर के साथ विश्व की सबसे तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था बनेगा, जबकि इस दौरान चीन की विकास दर 8.2 प्रतिशत ही होगी।

इसका एक कारण यह है कि भारत सरकार ने lockdown के दौरान जो 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की थी, उसमें से 8.04 लाख करोड़ अब तक अर्थव्यवस्था में पम्प किया जा चुका है। इसमें से भी 1.7 लाख करोड़ का पैकेज तो लॉकडाउन लगने के तुरंत बाद ही वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित किया गया था। सरकार की योजना कृषि से लेकर औद्योगिक सेक्टर तक, सभी क्षेत्रों को आवश्यकतानुसार सब्सिडी मुहैया कराने की है।  सरकार ने कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए 1 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा की है। इनमें से अधिकांश हिस्सा भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, रोड-रेल सुविधाओं के विकास में जाएगा, जो अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए सबसे आवश्यक तत्व है।

इसके अतिरिक्त भारत के बड़े उद्यमियों का विदेशी निवेश के आकर्षण में योगदान सराहनीय है। उदाहरण के किये भारतीय उद्यमी मुकेश अंबानी ने भारत में डिजिटल क्रांति को अगले चरण में पहुंचाने के लिए ICT से जुड़ी कई बड़ी कंपनियों के साथ समझौता किया।

भारतीय लोगों द्वारा की जा रही खरीदारी भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लगातार चलायमान रहने में एक बहुत बड़ा कारक रही है। अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी e कॉमर्स कंपनियों ने त्योहारों के समय कुल 4।1 बिलियन डॉलर मूल्य के सामानों का विक्रय किया। Apple India ने जुलाई से सितंबर के बीच रिकॉर्ड 8 लाख i phone बेचे। यह सब बातें बताती हैं कि भारत में विनिर्माण क्षेत्र भी तेजी से विकसित हो रहा है और सुस्ती के बावजूद इसमें विकास की अपार संभावना है।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि सरकार के साहसिक सुधारों, छोटे बड़े भारतीय उद्यमियों को सहयोग, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए किए जा रहे कार्यों, भारतीय उद्योगपतियों के कुशल फैसलों का भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। इसके अतिरिक्त सबसे महत्वपूर्ण है कि भारतीय जनमानस विशेष रूप से भारतीय युवा नई तकनीक, डिजिटल अर्थव्यवस्था और कुशल श्रम को तेजी से अपना रहा है। भारत का बड़ा बाजार और खरीदारों द्वारा लगातार किया जा रहा खर्च अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे संकेत हैं। अतः 2021 में तेज आर्थिक विकास की भविष्यवाणी की जा सकती है।

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