23 मौतों और अनगिनत “बीमार” लोगों के साथ, Pfizer वैक्सीन आपदा बन रही है

 


Pfizer वैक्सीन के ट्रायल के दौरान नॉर्वे में जो बातें सामने आईं हैं उसने इस वैक्सीन का इस्तेमाल कर रहे देशों को सक्ते में डाल दिया है। नॉर्वे में अब तक 29 लोगों की वैक्सीन लगने के बाद मौत हो चुकी है। अब तक 25000 लोगों का टीकाकरण हो चुका है। मौत अधिकांश उन लोगों की हुई है जिनकी आयु 75 वर्ष से अधिक है।

नॉर्वे में अभी केवल Pfizer वैक्सीन को ही ट्रायल की अनुमति मिली है इसलिए सभी मौत इसी से जोड़कर देखी जा रही है। नॉर्वे के स्वास्थ विभाग Norwegian Medicines Agency (NMA) ने बताया कि अधिकांश लोग साइड इफेक्ट महसूस कर रहे हैं। “अब तक Pfizer से 13 लोगों की मृत्यु का अवलोकन हो चुका है और 16 मृतकों कि जांच हो रही है।” सम्भव है कि जांच के बाद वैक्सीन के काम करने में आई कठिनाइयों और वैक्सीन के कारण मृत्यु कैसे हुई, इसके असल कारकों का पता लग पाएगा।

इस बीच वैक्सीन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गया है। चीन ने वैक्सीन से हुई मौत पर अमेरिकी मीडिया की चुप्पी पर निशाना साधा है। शुक्रवार को ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा “लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, मुख्यधारा के अंग्रेजी भाषा के मीडिया ने इस घटना की तुरंत रिपोर्ट नहीं की, जैसे कि वे पहले ही एक आम सहमति पर पहुंच चुके थे। US और UK के बड़े मीडिया एजेंसी जाहिर तौर पर अपनी मौतों को छुपा रहे थे।”

वैक्सीन को लेकर दुनियाभर में एक प्रतिस्पर्धा का माहौल है। कोरोना से जूझती दुनिया में वैश्विक शक्तियां, वैक्सीन को अपने प्रभाव को बढ़ाने का जरिया बनाना चाहती हैं। यही कारण है कि पश्चिमी मीडिया रूस और चीन की वैक्सीन को लेकर लगातार हमलावर रहा था एवं उसकी विश्वसनीयता को संदिग्ध करार दे रहा था। अब चीन को मौका मिला है तो वह भी अवसर का लाभ ले रहा है।

भले ही चीन Pfizer से मौत के बाद हमलावर हो गया हो किंतु पूर्व में उसकी वैक्सीन का भी यही हाल रहा है।गंभीर साइड इफेक्ट के चलते ही चीनी वैक्सीन द्वारा टीकाकरण को ब्राजील में रोकना पड़ा था।इसके बाद ब्राजील ने भारत का रुख किया था तथा भारत द्वारा 50 लाख वैक्सीन की आपूर्ति के लिए समझौता किया था।ब्राजील से आई खबरों के अनुसार इस वैक्सीन की कार्यक्षमता 60 प्रतिशत से भी कम है, जबकि यह दुनिया की सबसे महंगी वैक्सीन में एक है।

इस बीच भारत में विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू हो गया है।भारत में AstraZenca और भारत बायोटेक की वैक्सीन को टीकाकरण में इस्तेमाल किया जा रहा है। भारत बायोटेक की वैक्सीन को लेकर कई देश पहले ही अपनी रुचि जाहिर कर चुके हैं। भारत के पड़ोसी देश तो वैक्सीन के लिए मुख्यतः भारत पर ही निर्भर हैं। साथ ही यह वैक्सीन गरीब देशों की भी पसंद बन सकती है क्योंकि इसका दाम बहुत कम है।

चीन और रूस की वैक्सीन पहले ही संदिग्ध है और अब Pfizer को लेकर नॉर्वे से आई खबरों के बाद, यदि भारतीय वैक्सीन अपने टीकाकरण अभियान में कोई विशेष साइड इफेक्ट नहीं दिखाती, तो यह भारतीय वैक्सीन के लिए सुअवसर बन सकता है। भारत पहले ही खाद्यान्न संकट से जूझती दुनिया के लिए मुक्तिदाता बनकर सामने आया है, अब यदि वैक्सीन बेहतर परिणाम देती है तो भारत इस मामले में भी मानवता की उम्मीद बनकर उभर सकता है।

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