किसानों के उपद्रव को देख एक्टिव मोड में दिखे Amit Shah, दो अस्पतालों का किया दौरा,ये लिए एक्शन


गणतंत्र दिवस(Republic Day) के दिन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर रैली में हुए उपद्रव से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह(Amit Shah) काफी नाराज दिखाई दिए है। किसानों के इस विरोध प्रदर्शन में कई सुरक्षा कर्मी और पुलिस वाले गंभीर रूप से घायल हुए, जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। आज अमित शाह घायल पुलिस कर्मियों से मिलने अस्पताल में पहुंचे। किसानों की ट्रैक्टर रैली में घायल हुए पुलिस कर्मियों से मिलने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दो अस्पतालों का दौरा किया। आइए जानते हैं कि इस मामले में अभी तक क्या क्या हुआ है..

25 लोगों पर दर्ज एफआईआर

इस मामले को लेकर दिल्ली पुलिस ने  अभी तक 25 लोगों पर एफआईआर दर्ज कर है, जिनमें 50 किसान नेताओं को नामजद किया गया है। वहीं, करीब 70 उपद्रवियों के ऊपर शिकंजा कस दिया गया है। करीबन 20 लोगों की इसमें गिरफ्तारी हो गई है, जबकि कम से कम  50 उपद्रवियों को अभी हिरासत में रखा गया है। बुधवार को हुई  मीटिंग में दिल्ली पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने गृह मंत्री शाह को इन बातों की विस्तार में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब दिल्ली पुलिस का पूरा फोकस अगले कुछ दिनों में सीसीटीवी और वीडियो फुटेज खंगालकर सबूत जुटाने और उन लोगों की पहचान करने पर होगा जिन्होंने हिंसा के लिए उकसाया और जो खुद हिंसा में शामिल रहे। जांच इस बात की जाएगी कि इतना बड़ा बवाल काटने के लिए फंड और संसाधन कहां से मुहैयार कराई गई। सूत्रों की मानें तो पहचान में आने वाले सभी उपद्रवियों, किसान संगठनों के नेताओं पर कड़ी कार्रवाई होना तय है। खबरों के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय(ED) ने भी पुलिस की एफआईआर के आधार पर किसान नेताओं पर मना लॉन्ड्रिंग का शिकंजा कस दिया हैं। सरकार को ऐसा लग रहा है कि कुछ किसान नेता देश विरोधी संगठनों से पैसा ले रहे हैं। कानूनी सलाह के बाद ही ईडी किसी नतीजे पर पहुचेगी और फिर आगे कोई फैसला लेगी।

किसान नेताओं ने झाड़ा पल्ला

घटना के बाद घबराए किसान नेताओं ने भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए  काफी चालाकी दिखाई है। किसान नेताओं ने खुद को हिंसा एवं उत्पात की घटनाओं से खुद का पल्ला झाड़ लिया है। दो किसान संगठन ने तो आंदोलन भी खत्म कर दिया। हालांकि, अभी आंदोलन में डटे किसान संगठनों के नेताओं ने जोर देकर कहा कि ट्रैक्टर परेड के दौरान बाहरी तत्वों ने बवाल काटा जिसकी जांच होनी चाहिए। दिल्ली पुलिस किसान नेताओं की गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा में भूमिका की जांच कर रही है।

रैली के मार्ग और समय के बारे में पुलिस के साथ हुए समझौते के कथित उल्लंघन को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के नेता दर्शन पाल को नोटिस भेजा गया है। दिल्ली पुलिस का मानना है कि दर्शन पाल जैसे किसान नेताओं ने उग्रवादी तत्वों को सिंघु, टिकरी और गाजीपुर की सीमाओं पर भड़काया। वहीं, लाल किले पर हुए उपद्रव के पीछे पंजाबी ऐक्टर दीप सिद्धू के प्रमुख होने की बात सामने आ रही है। उसी ने लाल किले की प्राचीर पर सिखों का धार्मिक झंडा ‘निशान साहिब’ फहराने का विचार दिया था और अपने इस विचार को पूरा भी किया था।

दीप सिद्धू को फिर जाएगा नोटिस

सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय जांच अभिकरण जल्द ही दूसरा नोटिस जारी कर दीप सिद्धु को फिर समन देगी और उसे सिख फॉर जस्टिस (SFJ) और बब्बर खालसा जैसे खालिस्तान समर्थक संगठनों के खिलाफ मुकदमों में गवाह बनाएगी। एनआईए ने दीप सिद्धू के साथ 40 लोगों को गवाह के तौर पर समन भेजा है, जिनमें से सिर्फ 15 से 16 लोग ही एजेंसी पहुंचे हैं। पहली नोटिस का सिद्धू ने कोई जवाब नहीं दिया था। 15 दिसंबर 2020 को दर्ज एनआईए की एफआईआर के हिसाब से एसएफजे एवं अन्य प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठनों ने नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों के बीच डर का माहौल बनाने, साजिश रचने और उन्हें उपद्रवी गतिविधियों में धकेलने में बड़ी भूमिका निभाई है।

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