BJP आंध्र प्रदेश में 1992 जैसी रथ यात्रा शुरू करेगी, राज्य के हिंदू विरोधी नेताओं के लिए ये बैड न्यूज है


आंध्र प्रदेश की राजनीति में हिंदुत्व को लेकर एक उठा-पटक की स्थिति है। YSRCP और TDP दोनों ही क्षेत्रीय पार्टियां खुद को एक दूसरे से बेहतर हिन्दू बताने की कोशिशें कर रही हैं, क्योंकि दोनों के ही शासन में हिंदू देवी-देवताओं के मंदिरों को खूब तोड़ा गया है। ऐसे में अब बीजेपी ने इन दोनों को सबक सिखाने के लिए 1992 वाली रथयात्रा की हिंदुत्ववादी प्लानिंग तैयार कर ली है जिसके तहत वो विजयनगरम से तिरुपति तक भव्य रथ यात्रा निकलेगी और हिंदू विरोधी पार्टियों को असल हिंदुत्व से अवगत कराएगी।

जिस तरह से पिछले कुछ दिनों में आंध्र प्रदेश में मंदिरों को तोड़ा गया है, उससे राज्य का हिंदू समाज काफी आहत है। ऐसे में बीजेपी ने हिंदू विरोधी राजनीतिक पार्टियों को सबक सिखाने के लिए एक विशाल श्रीराम रथ यात्रा निकालने की प्लानिंग की है, जो कि एक विरोध प्रदर्शन का संकेत देगी, साथ ही इसमें भक्ति भाव भी होगा। ये यात्रा जनवरी के आखिरी या फरवरी की शुरुआत में निकलेगी, जो कि सभी के लिए आकर्षण का केंद्र होगी। खबरों के मुताबिक ये श्रीराम नामित रथ यात्रा विजयनगरम् के रामतीर्थम् से तिरुपति के कपिलतीर्थम् तक निकाली जाएगी।

इस रथयात्रा को लेकर आखिरी फैसला 17 जनवरी को Vizag में होने वाली बीजेपी की बैठक में लिया जाएगा। बीजेपी यहां लगातार राज्य सरकार के खिलाफ मंदिरों के टूटने का विरोध करती रही है। ऐसे में ये रथ यात्रा एक विरोध प्रदर्शन का संदेश देने वाली होगी। न्यू इन्डियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 13 जिलों से होकर गुजरने वाली इस रथयात्रा में बीजेपी के राष्ट्रीय स्तर के भी नेता शामिल होंगे।

यही नहीं तिरुपति की लोकसभा सीट पर उपचुनाव भी होंगे, क्योंकि YSRCP के सांसद का कोरोनावायरस के कारण निधन हो चुका है जिस कारण सीट खाली है। ऐसे में बीजेपी तेलंगाना की दुबका सीट की तर्ज पर ही आंध्र में इस रथ यात्रा के जरिए सभी का ध्यान आकर्षित करना चाहती है जो सकारात्मक हो सकता है, क्योंकि राज्य की जनता दोनों ही राजनीति पार्टियों से तंग आ चुकी है और कांग्रेस का वहां जनाधार न के बराबर है, जो बीजेपी के लिए एक अच्छा मौका बन सकता है।

आंध्र प्रदेश में YSRCP के प्रमुख और मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी हिंदू मंदिरों के टूटने के कारण ही दबाव में हैं। जिसके चलते उन्होंने हाल ही में विजयवाड़ा के 9 हिंदू मंदिरों के पुनर्निर्माण का भूमिपूजन किया था, और मंदिरों के टूटने की घटनाओं को राजनीति से प्रेरित बताया था। दिलचस्प ये है कि उन्होंने भी इस मुद्दे पर राजनीति ही की थी क्योंकि उन्होंने उन मंदिरों का भूमिपूजन किया जो 2016 में तोड़े गए थे। उस दौरान राज्य में TDP नेता चंद्रबाबू नायडू  की सरकार थी।

इन मंदिरों के विध्वंस की राजनीति में TDP नेता और पूर्व सीएम चंद्रबाबू नायडू अपनी राजनीति कर रहे हैं। उन्हें डर है कि इस वक्त  बीजेपी की सक्रियता उनका अच्छा-खास वोट बैंक चुरा सकती है। ऐसे में वो जगन पर हमलावर होते हुए ये तक कह रहे हैं कि जगन एक ईसाई हैं, इसलिए वो हिंदुओं को ताक पर रखकर अल्पसंख्यकों को महत्व दे रहे हैं। चंद्रबाबू नायडू खुद को बेहतर हिंदू साबित करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं, वहीं बीजेपी अभी तक इन दोनों ही दलों का सारा तमाशा देख रही थी।

आंध्र प्रदेश में मंदिर टूटने की घटनाओं का जिक्र सोशल मीडिया से लेकर मेन-स्ट्रीम मीडिया में खूब बढ़-चढ़कर किया गया है। जिससे लोग गुस्से में हैं। दोनों क्षेत्रीय पार्टियों की हिंदू विरोधी नीतियों को देखते हुए बीजेपी ने अब उन्हें असल हिंदुत्व सिखाने की तैयारी की है; जिससे राज्य में तिरुपति लोकसभा उप-चुनाव से लेकर अन्य चुनावों में लाभ के साथ-साथ जनता का हित भी हो, साथ ही इस श्रीराम रथ यात्रा की गूंज पूरे देश में भी जाएंगी जो कि 1992 की तरह देश में अलग-अलग स्तर पर सकारात्मक हो सकती है।

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