मोदी राज में बजाज ने सफलता के सभी रिकॉर्ड तोड़े, लेकिन राहुल को कांग्रेस की चाटुकारिता से फुर्सत नहीं

 


मोदी सरकार की नीतियों का विरोध करने वाले कांग्रेस चाटुकार उन्हीं नीतियों के कारण लाभ कमा रहे हैं।
बजाज ऑटो ग्रुप भारतीय ऑटो मोबाइल सेक्टर का सबसे पुराना और बड़ा खिलाड़ी माना जाता है। इसके एमडी और सीईओ आए दिन मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना करते रहते हैं।

यद्यपि उन नीतियों के कारण ही आज बजाज का मुनाफा आसमान छू रहा है और कंपनी का दोपहिया मार्केट सेक्टर में एक लाख करोड़ से ज्यादा का कैपिटलाइजेशन हो चुका है, जिसके साथ ही बजाज भारत की नंबर एक मोटरसाइकिल निर्यातक कंपनी बन गई है।

इतना मोटा मुनाफा कमाने के बावजूद कंपनी के प्रमुख राहुल और राजीव बजाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की आलोचना करते रहते हैं जो दिखाता है कि ये लोग गांधी परिवार की चापलूसी में धूर्तता की पराकाष्ठा पार कर चुके हैं।

बजाज दोपहिया ऑटोमोबाइल मार्केट में 1 लाख करोड़ के कैपिटलाइजेशन को पार करने वाली दुनिया की पहली दुपहिया कंपनी बन गई है। 1 जनवरी 2021 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में कंपनी का शेयर 3,479 रुपए के मूल्य पर मूल्य बंद हुआ। जिसके साथ ही ये कीमत 1,00,670.76 करोड़ रु पर पहुंच गई और विश्व स्तर में बजाज शीर्ष पर पहुंच गया।

बजाज ऑटो ने एक बयान में कहा कि अन्य सभी घरेलू दोपहिया कंपनियों की तुलना में बजाज का मुनाफा काफी अधिक है। कंपनी ने विश्लेषकों के हवाले से कहा कि दुपहिया मार्केट में 1 लाख करोड़ रुपए कैपिटलाइजेशन दुनिया की किसी भी अंतरराष्ट्रीय दोपहिया कंपनी ने हासिल नहीं किया है। खास बात ये है कि इस वर्ष बजाज अपने संचालन की 75 वर्षगांठ मना रहा है।

इस मौके पर पूरा बजाज ऑटो ग्रुप खुश है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव बजाज ने इस दौरान कहा, “मोटरसाइकिल श्रेणी में कंपनी के फोकस और विभिन्नता देने की अटूट प्रतिबद्धता के साथ-साथ वैश्विक महत्वकांक्षा रखने वाली TPM के सहयोग से आज बजाज दुनिया भर में सबसे मूल्यवान दोपहिया कंपनी बन गई है।”

एक रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर 2020 में कंपनी ने कुल 3,72,532 यूनिट्स की बिक्री की। इसमें 11 फीसदी की बढ़त रही। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी ने 3,36,055 यूनिट्स बेचे थे। वहीं दूसरी ओर 1,39,606 यूनिट्स के साथ घरेलू बिक्री में 9 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। नवंबर में कंपनी ने घरेलू बाजार में 1,53,163 यूनिट्स बेची थी।

बजाज उन्हीं कंपनियों में शामिल है जिसने 1991 में लाइसेंस और परमिट राज के खत्म होने का विरोध किया था, और बजार को उदारवादी बनाने की आलोचना की थी, क्योंकि नई कंपनियों के आने के कारण इनका घटिया माल नहीं बिक रहा था। कांग्रेस समर्थक होने के बावजूद यूपीए सरकार के दौरान इनके शेयर धराशाई हो गए थे।

पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंहा राव के सपने को साकार करते हुए जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उदारवाद के नए स्तर की ओर कदम बढ़ा रहे थे, तो चंद कंपनियों ने उनकी नीतियों की आलोचना की थी, जिसमें बजाज प्रमुख थी। ऐसे में प्रतिस्पर्धा के नए दौर में जब बजाज ने मजबूरन अपनी क्वालिटी में बदलाव किए तो उसका आज असर ये दिख रहा है कि बजाज दुनिया की नंबर वन दुपहिया वाहन कंपनी बन गई है।

ऑटो सेक्टर की गिरावट को लेकर राजीव बजाज पहले भी मोदी सरकार की आलोचना करते रहें हैं, जबकि उनकी सारी भविष्यवाणी फेल हो गईं है और ये कोई और नहीं बल्कि बजाज का ऑटो सेक्टर में बढ़ता ग्राफ ही प्रतिबिंबित कर रहा है।

आर्थिक लिबरलाइजेशन से लेकर नोटबंदी और असहिष्णुता के मुद्दे पर भी बजाज के प्रमुख राहुल बजाज मोदी सरकार को घेर चुके हैं, क्योंकि वे कांग्रेस समर्थक हैं। बजाज ग्रुप की गांधी परिवार से करीबियां किसी से छिपी नहीं है। हालांकि इसका उनके बिजनेस पर चवन्नी भर भी सकारात्मक असर नहीं पड़ा और वो अधर में ही जाते रहे।

इसके इतर मोदी सरकार की नीतियों के कारण ही बजाज ग्रुप दोपहिया वाहन मार्केट में भारत का गौरव बन गया है, लेकिन मज़ाल है कि अपनी विफलता के लिए मोदी सरकार को कोसने वाले, सफलता के लिए मोदी सरकार की प्रशंसा करें? ऐसा इसलिए भी है क्योंकि इनका राजनीतिक पूर्वाग्रह इनकी सबसे बड़ी बाधा है।

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