जानिए कौन हैं किसान नेता राकेश टिकैत और कितने करोड़ की है संपत्ति

 

नई दिल्ली। कभी-कभी एक घटना लोगों को आसमान से जमीन पर ले आती है और कभी-कभी जमीन से आसमान तक भी पहुंचा देती है। कल तक किसान नेता राकेश टिकैत के बारे में यह कयास लगाया जा रहा था कि जल्द ही उनकी गिरफ्तारी हो सकती है, आज वही यूपी बॉर्डर पर अपने समर्थकों के साथ प्रशासन के लिए एक बार फिर बड़ी चुनौती बनते दिखाई दे रहे हैं। कैमरे के सामने उनका रोना काम आ गया है और प्रदेश के अलग-अलग शहरों से उनके समर्थन में लोग जुटना शुरू हो गए हैं। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत का नाम आज हर किसी को पता है, लेकिन इससे पहले वह क्या थे और उनके पास कितने करोड़ की संपत्ति है यह बात कुछ लोगों को ही पता है। यहां हम उनके जीवन से जुड़ी कुछ जानकारियों का जिक्र करने जा रहे हैं, जिसे सुनकर आपको भी हैरानी होगी। जिस राकेश टिकैत को लोग किसान नेता के नाम से जान रहे हैं वह कभी दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर हुआ करते थे। इतना ही आज वह करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं।

किसान नेता राकेश टिकैत दो बार चुनाव भी लड़ चुके है, लेकिन दोनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। राकेश टिकैत को तो किसान की राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता महेंद्र सिंह टिकैत भारतीय किसान के अध्यक्ष हुआ करते थे। बता दें कि राकेश टिकैत का जन्म 4 जून, 1969 को यूपी के मुजफ्फरनगर जिले के सिसौली गांव में हुआ था। उन्होंने मेरठ यूनिवर्सिटी से एमए की पढ़ाई करने के बाद एलएलबी की और वकील बन गए। इसके बाद वह पुलिस में चले गए। वर्ष 1992 में राकेश टिकैत दिल्ली में सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे। वर्ष 1993-94 में महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में दिल्ली में किसान आंदोलन चल रहा था। महेंद्र सिंह टिकैत राकेश टिकैत के पिता थे, इसलिए आंदोलन को खत्म कराने के लिए अपने पिता को मनाने के लिए उनपर दबाव बनाया गया। राकेश टिकैत ने दबाव में आने की जगह नौकरी छोड़कर किसानों के साथ खड़े हो गए।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान राकेश टिकैत की तरफ से दिए गए शपथ पत्र के मुताबिक उनकी संपत्ति 4,25,18,038 रुपए थी। इसके साथ उनके पास 10 लाख रुपए कैश भी था। राकेश टिकैत पहली बार वर्ष 2007 में मुजफ्फरनगर के खतौली विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2014 में अमरोहा जनपद से राष्ट्रीय लोग दल के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन इस बार भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

close