राकेश टिकैत को मिला केजरीवाल समेत इन नेताओं का समर्थन

 

arvind rakesh tikait

नई दिल्ली। 26 जनवरी को किसान ट्रैक्टर परेड के दौरान आंदोलन के हिंसक हो जाने के बाद कमजोर पड़ चुका आंदोलन एक बार फिर जोर पकड़ने लगा है। कल दिन में खाली हो रहे बॉर्डर पर एक बार फिर किसानों की भीड़ जुटने लगी है। किसान नेता राकेश टिकैत की आँखों से कल रात गिरे आंसुओं का बाद एक बार फिर आंदोलन ने यू टर्न ले लिया है। आंदोलन से वापस लौट रहे किसानों ने फिर से आंदोलन की तरफ रुख कर लिया है और भिवानी, हिसार, कैथल, जींद, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, बिजनौर से रात में ही किसानों का जत्था गाजीपुर बॉर्डर की तरफ निकल पड़ा। इधर किसान आंदोलन को दिल्ली की मुख्यमंत्री केजरीवाल समेत तमाम नेताओं का भी खुला समर्थन मिल रहा है।

किसान आंदोलन के अगुवा राकेश टिकैत को खुला समर्थन देते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने एक ट्वीट कर कहा- ‘राकेश जी, हम पूरी तरह से किसानों के साथ हैं, आपकी मांगे वाजिब हैं, किसानों के आंदोलन को बदनाम करना, किसानों को देशद्रोही कहना और इतने दिनों से शांति से आंदोलन कर रहे किसान नेताओं पर झूठे केस करना सरासर ग़लत है।”

इसी कड़ी में दिल्ली के उप मुख्यमंत्री और आप नेता मनीष सिसोदिया राकेश टिकैत से मिलने गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे, उन्हों ने कहा- ”मुझे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी ने भेजा है, उनका निर्देश था कि मैं जाकर पानी वगैरह की व्यवस्था देखूं, इसलिए मैं यहां आया था, पेट इंटरनेट से या इन कानूनों से नहीं भरेगा, वह रोटी से भरेगा,किसान की पगड़ी उछलने की कोशिश की जा रही है, हम साथ है, जिनको पानी की ज़रूरत है तो पूरी व्यवस्था है यहां,”

अखिलेश ने फोन कर जाना राकेश टिकैत का हाल 

अरविन्द केजरीवाल के बाद अब यूपी के पूर्व मुख्यमन्त्री अखिलेश यादव और मायावती का भी राकेश टिकैत को खुला समर्थन मिला है। अखिलेश यादव ने राकेश टिकैत ने फोन पर बात की और उनसे उनके स्वास्थ के बारे में पूछा। अखिलेश ने कहा समाजवादी पार्टी हर स्तर पर किसानों की लड़ाई लड़ रही है।

इधर उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीएसपी सुप्रीमो मायावती की पार्टी बीएसपी ने भी किसान आंदोलन के समर्थन में आज संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार किया है। मायावती ने यह जानकारी ट्वीट कर दी।

उन्होंने ट्ववीट किया, ”बीएसपी ने, देश के आन्दोलित किसानों के तीन विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग नहीं मानने व जनहित आदि के मामलों में भी लगातार काफी ढुलमुल रवैया अपनाने के विरोध में, आज मा. राष्ट्रपति के संसद में होने वाले अभिभाषण का बहिष्कार करने का फैसला लिया है, साथ ही, कृषि कानूनों को वापस लेकर दिल्ली आदि में स्थिति को सामान्य करने का केन्द्र से पुनः अनुरोध तथा गणतंत्र दिवस के दिन हुए दंगे की आड़ में निर्दोष किसान नेताओं को बलि का बकरा न बनाए. इस मामले में यूपी के बीकेयू व अन्य नेताओं की आपत्ति में भी काफी सच्चाई. सरकार ध्यान दे।’

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