पं. नेहरू के एक इशारे पर अपना सब कुछ दान करने वाला देशभक्त भुखमरी की बिता रहा है जिंदगी, जानें पूरा माजरा

 

pandit nehru

देशभक्ति से जुड़ी जब भी हम कोई कहानी और बात सुनते हैं तो उससे हम बहुत प्रभावित होते हैं. लेकिन इसके बाद हम ये भूल जाते हैं कि जिसने देशभक्ति में अपनी पूरी जिंदगी गुजार दी वो कहां है, कैसे है, किस स्थिति में जिंदगी बिता रहा है. दरअसल जिस देशभक्त के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं, उसकी भी कहानी कुछी ऐसी है, जिसे सुनने के बाद आपका भी दिल भर आएगा. उत्तर प्रदेश के जिले झांसी में रहने वाले मोहन कुशवाहा ने अपनी पूरी जिंदगी देश के जज्बे में गुजार दी, और आज भी उनकी देशभक्ति बरकरार है. साल 1962 में चीन से हुए युद्ध के दौरान मौहन कुशवाहा ने देशभक्ति के नाम पर अपना सब कुछ दान कर दिया, लेकिन आज के समय में वो जिस संकट में अपनी जिंदगी बिता रहे हैं, उसे देखने और सुनने के बाद उस पर रोना आएगा.

पंडित जवाहर लाल की एक अपील पर मोहन कुशवाहा ने अपना सब कुछ देश के नाम पर न्योछावर कर दिया. इस समय वो झांसी जिले के मऊरानीपुर तहसील क्षेत्र के सकरार गांव में रहते हैं. उनकी जिंदगी ऐसे हालातों से जूझ रही है, जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते. देशभक्ति में अपनी पूरी जिंदगी गुजारने वाले मोहन कुशवाहा खाने को मोहताज हैं. रहने को छत नहीं है और खाने को भोजन नहीं है, लेकिन उनकी देशभक्ति अभी जिंदा है. दरअसल 1962 में पीएम पंडित जवाहर लाल नेहरू के आग्रह पर कुशवाहा के पास जो कुछ था उन्होंने देश की मदद में दान कर दिया और आज खुद दर-दर भटक रहे हैं.

साल 1962 की बात है जब भारत का युद्ध चीन से हुआ. उस समय देश भुखमरी के संकट से जूझ रहा था. जिसे देखने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री ने आकाशवाणी के जरिए देश के लोगों से अपली की और बताया कि इस समय पूरा भारत भुखमरी के गंभीर संकट से जूझ रहा है. ऐसे में यदि कोई अपनी तरफ से कुछ मदद कर सकता है तो वो सहायता के लिए हाथ बढ़ाए. ये बात सुनने के बाद कुशवाहा का सीना देशभक्ति से चौड़ा हो गया. उन्होंने मदद के लिए अपने मां तक के कंगन बेच दिए. जब तक चीन के साथ भारत का युद्ध चला तब तक मनीऑर्डर के जरिए वो पैसे देते रहे.

हैरानी की बात तो ये है कि पूरी जिंदगी जज्बे में बिता देने वाला देशभक्त आज मऊरानीपुर के अपने गांव सकरार में सड़क किनारे एक पन्नी की झोपड़ी बनाकर रहने को मजबूर है. दो वक्त की रोटी उन्हें नसीब होती भी है या नहीं ये तो उनका दिल जानता है. मोहन कुशवाहा की उम्र 95 साल की है. लेकिन उनके अंदर का इंसान आज भी जिंदा है. हालांकि ये देशभक्त आज के समय में लोगों के बीच होकर भी नहीं हैं. दिलचस्प बात तो ये है कि इतना कुछ जिंदगी में झेलने के बाद भी उनका जज्बा देश के लिए वही है. लेकिन नेताओं का ध्यान हम उनकी तरफ खींचना चाहेंगे, जिससे देश की जनता उम्मीद लगाए बैठी होती है. क्या मोहन कुशवाहा जैसे देशभक्तों को सम्मान से जीने का हक नहीं है, जिन्होंने अपने देश के लिए जिया. फिलहाल अब इंतजार है कि उनकी देशभक्ति से देश के नेता कितने प्रभावित होते हैं. उम्मीद है कि सरकार उनके इस भक्ति को सम्मान देगी, और जल्द ही कोई फैसला करेगी.

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