‘परमाणु राष्ट्र के तौर पर स्वीकार करें, हम चीन को सबक सिखाने में मदद करेंगे’, उत्तर कोरिया का दुनिया को स्पष्ट संदेश है

 


आज कल उत्तर कोरिया में जिस तरह से कम्युनिस्ट प्रशासन व्यवहार कर रहा है उससे  ऐसा लगता है कि यह कम्युनिस्ट देश बीजिंग से दूर होकर पश्चिम के साथ नज़दीकियां बढ़ाना चाहता है।

उत्तर कोरियाई सुप्रीम लीडर किम जोंग-उन पश्चिमी दुनिया के साथ बेहतर संबंधों पर बातचीत करने का इशारा देते नजर आ रहे हैं। वह प्योंगयांग की मौजूदा विचारधारा और उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था को बड़ा बनाने की आवश्यकता के साथ आर्थिक लक्ष्यों को पूरा करने में मिली असफलता के बारे में भी बात करने लगे हैं।

ऐसा लगता है कि अब Pyongyang (प्योंगयेंग) दुनिया को यह स्पष्ट इशारा कर रहा है कि वह चीन को रोकने में मदद करने के लिए तैयार है, बशर्ते कि North korea को परमाणु शक्ति बने रहने की अनुमति दी जाए। हाल ही में हुए एक सत्तारूढ़ पार्टी की बैठक के दौरान किम ने अपने देश को परमाणु सम्पन्न बनाने के अपनी योजना को दोहराया। साथ ही उन्होंने उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था को ठीक करने की बात कही है। अगर एक कम्युनिस्ट देश अर्थव्यवस्था सुधारने की बात कर रहा है तो उसका अर्थ कुछ और नहीं बल्कि एक बड़ा बदलाव है।

यही नहीं किम यो जोंग जो कि North korea के सर्वोच्च नेता की बहन हैं ,उन्हें दक्षिण कोरिया के बारे में की गयी अस्वाभाविक टिप्पणी के लिए demote कर दिया गया है।

यहाँ समझने वाली बात यह है उत्तर कोरिया गिरती अर्थव्यवस्था के कारण किम जोंग उन पर भारी दबाव है। हाल ही में, किम ने भी स्वीकार किया कि उनके देश की आर्थिक विकास योजना “लगभग सभी क्षेत्रों” में फेल हो गई।

उन्होंने पिछले पांच वर्षों को ” unprecedented ” और उत्तर कोरिया के लिए “सबसे खराब” कहा।

यह काफी प्रासंगिक भी है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में, North korea बीजिंग के इशारे पर जापान, दक्षिण कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका के खिलाफ आक्रामक नीति अपना कर उसके हाथों की कठपुतली बन चुका है। लेकिन किम के बीजिंग समर्थक दृष्टिकोण से उत्तर कोरिया को कोई फायदा नहीं हुआ है।

पिछले वर्ष चीन-उत्तर कोरिया के बीच व्यापार में नाटकीय रूप से कमी देखने को मिली जब North korea को कोरोना के कारण संघर्ष करना पड़ा।

किम जोंग ने यह भी कहा कि उत्तर कोरिया की आर्थिक समस्याएं “वर्तमान के गलत वैचारिक दृष्टिकोण, गैर जिम्मेदाराना रवैया, अक्षमता और बेकार कार्य पद्धति के कारण ही हो सकती हैं।” ऐसा लगता है कि प्योंगयांग का न केवल चीन बल्कि कम्युनिज़्म से भी मोहभंग हो रहा है।

उत्तर कोरिया लगातार सिओल और वाशिंगटन को तनाव कम करने के लिए संकेत देता रहता है, और अब किम जोंग-उन ने भी किम यो जोंग की पद में अवनति कर एक और संकेत दिया है। पूर्व में पोलित ब्यूरो के एक वैकल्पिक सदस्य, किम की बहन को वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया (WPK) में शीर्ष अधिकारियों के रोस्टर से बाहर कर दिया गया है। उसे पोलित ब्यूरो में दोबारा स्थान नहीं दिया गया है और उसे केंद्रीय समिति में 20 वें स्थान पर रखा गया है।

लेकिन उसे क्यों डिमोट किया गया है? दिलचस्प बात यह है कि उनकी यह अवनति दक्षिण कोरिया के बारे में कुछ भद्दी टिप्पणियां करने के बाद ही हुई। किम यो जोंग ने दक्षिण कोरिया के बारे में कहा था कि, “वे मूर्ख हैं और दुर्व्यवहार में दुनिया की सूची में सबसे ऊपर हैं।”

उन्होंने यह बयान तब दिया था जब दक्षिण कोरिया के अधिकारियों के उत्तर कोरिया की होने वाली संभावित सैन्य परेड पर नज़र रखने की खबर आई थी।

किम यो जोंग की अवनति को विश्व के लिए उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता की तरफ से एक good will समझा जा सकता है। साथ ही वह सियोल को बता रहा है कि वह दक्षिण कोरियाई अधिकारियों के खिलाफ अनावश्यक रूप से आक्रामक नहीं होंगे।

वहीं, किम जोंग-उन ने उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता को मजबूत करने के बारे में भी बयान दिया। वह संकेत दे रहा है कि चाहे जो भी हो, उत्तर कोरिया परमाणु शक्ति बना रहेगा। हालांकि, वह नहीं चाहते कि बाकी दुनिया North korea के परमाणु शस्त्रागार को बड़े खतरे के रूप में समझे।

यानि कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि किम जोंग उन चीन के खिलाफ पश्चिम के साथ सहयोग करने के लिए तैयार है, बशर्ते कि प्योंगयांग को परमाणु शक्ति के तौर पर स्वीकार किया जाए।

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