ओवैसी बोले ‘अयोध्या वाली मस्जिद में नमाज पढ़ना हराम है’, तो उलेमा ने कहा मुफ्ती न बनिए आप


 भले ही सुप्रीम कोर्ट राम जन्मभूमि व बाबरी मस्जिद मसले का पटाक्षेप कर चुकी हो, लेकिन अभी-भी लोगों के जेहन में इसे लेकर कुंठा का वास है, जो कई मौकों पर परिलक्षित होता हुआ दिखता है। इस बीच हैदराबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लीमिन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि अय़ोध्या की मस्जिद के लिए चंदा देना व वहां नमाज अता हमारे लिए हराम है। 

इससे तो बेहतर रहेगा कि हम यह दान किसी  अनाथालय या फिर किसी जरूरतमंद को दें। उनके इस बयान पर नाराजगी व्यक्त करते हुए ट्रस्‍ट इंडो इस्‍लामिक कल्‍चरल फाउंडेशन के सचिव अतहर हुसैन  ने कहा कि ओवैसी साहब आप एक सियासतदान है। मेहरबानी होगी कि आप सियासतदान ही रहें मुफ्ती या  उलेमा बनने की जहमत न उठाएं। आप संविधान के जानकार हैं न की शरियत के, लिहाजा कहां  नमाज अता करना है और कहां नहीं यह हम तय कर लेंगे। इस पर आप हस्तक्षेप न करें।

आपको बता दें कि गणतंत्र दिवस के मौके  पर जब से विवादित स्थल पर मस्जिद की नींव रखी गई है, तब से इसे लेकर सियासत अपने चरम पर पहुंच चुकी है। इस कड़ी में ओवैसी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में 5 एकड़़ जमीन मस्जिद निर्माण के लिए दिया था। यह  हमारे लिए कोई  मस्जिद नहीं बल्कि मस्जिद ए जीरार है। यहां हमारे लिए नमाज अता करना भी हराम रहेगा और इसके निर्माण के लिए चंदा देना हमारे लिए हराम है।

इससे बेहतर रहेगा कि हम इस पैसे को किसी  अनाथालय में दें। गौरतलब है कि सुप्री्म कोर्ट ने 2019 के नवंवर माह में अपने फैसले में विवादित स्थल को राम मंदिर निर्माण के पक्ष में सुनाया था तो वहीं बाबरी मस्जिद के  लिए 5 एकड़ जमीन आवन्टित की थी, जिसे लेकर अब ओवैसी का यह बयान  सामने आया है। बहरहाल, उनका यह बयान अभी खासा सुर्खियों में छाया हुआ है। 

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