राजकीय सम्मान के साथ स्वतंत्रता सेनानी को दी गई अंतिम विदाई

 


कन्नौज: आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले गोवर्धन लाल कनौजिया का गुरुवार को कानपुर में इलाज के दौरान निधन हो गया था. उनके निधन की जानकारी मिलते ही इत्रनगरी में शोक की लहर दौड़ गई. देर रात उनका पार्थिव शरीर पैतृक घर पहुंचा. उनके अंतिम दर्शनों के लिए सैकड़ों लोगों की भीड़ उनके आवास पर उमड़ पड़ी. शुक्रवार को राजकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई. इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे.

स्वतंत्रता सेनानी की राजकीय सम्मान के साथ विदाई
स्वतंत्रता सेनानी की राजकीय सम्मान के साथ विदाई

पूरा मामला

तिर्वा कोतवाली क्षेत्र निवासी जंग-ए आजादी के योद्धा स्वतंत्रता सेनानी गोवर्धन लाल कनौजिया का स्वास्थ्य बिगड़ने पर परिजनों ने उन्हें कानपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया था. जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. शुक्रवार को उनका पार्थिव शरीर उनके तिर्वा स्थित पैतृक गांव पहुंचा. वह 107 वर्ष की आयु पूरी कर चुके थे. उनके अंतिम दर्शन के लिए लोगों का तांता लगा रहा. शुक्रवार को राजकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई. जवानों ने उन्हें सलामी दी. इस मौके पर जिले के आलाधिकारी मौजूद रहे. तिर्वा एसडीएम जयकरन ने बताया कि सरकार की तरफ से उनके परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की गई है.

महात्मा गांधी से प्रेरित होकर शामिल हुए थे आजादी की लड़ाई में

स्वतंत्रता सेनानी गोवर्धन लाल कनौजिया का जन्म 30 अक्टूबर, 1913 को हुआ था. अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद वह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आन्दोलन से प्रेरित होकर जंग-ए आजादी की लड़ाई में कूद पड़े. तिर्वा स्थित क्रान्तिकारी शहीद स्थल तमोली मन्दिर पर साल 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान उन्होंने अंग्रेजी हुकुमत के एक दरोगा को पीटा था. जिस पर उन्हें 14 माह की सजा हुई थी. इसके अलावा भी कई बार आजादी की लड़ाई के दौरान वह जेल गए थे. आजादी मिलने के बाद भी वह चुप नहीं बैठे. लगातार समाजसेवा के क्षेत्र में काम करते रहे. तिर्वा तहसील क्षेत्र में वह सबसे अधिक लम्बी आयु पूरी करने वाले सेनानी रहे.

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