अमरिंदर सिंह ने किसान आंदोलन को समर्थन दे, मारी अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी, अब उन्हीं को मारने के लिए छप रहे हैं पोस्टर


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किसी दूसरे के लिए गड्ढा खोदने वाले खुद उसमें गिर सकते हैं, ये संभावना पंजाब के मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह के लिए फिट बैठ गई है। अमरिंदर सिंह ने पिछले तीन चार महीनों में कृषि बिल को लेकर केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ विरोध का ऐसा सुर छेड़ा कि किसान भड़क गए और आंदोलन करने लगे।

अमरिंदर ने उन्हें अंदरखाने खूब सपोर्ट किया लेकिन जब अराजकता हद से ज्यादा बढ़ गई तो ये आंदोलन अमरिंदर सिंह पर ही भारी पड़ रहा है। अमरिंदर सिंह को मारने वाले को 10 लाख डॉलर का इनाम देने की पोस्टर लग गए हैं जो उनके लिए एक खतरे की घंटी की तरह ही हैं।

एक तरफ देश की राजधानी दिल्ली की सभी सीमाओं समेत पूरे पंजाब और हरियाणा में केन्द्र द्वारा प्रस्तावित कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे है तो दूसरी ओर कुछ अज्ञात लोगों ने पंजाब के मोहाली सेक्टर 66/67 में पोस्टर लगाए हैं जिसमें कहा गया है कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की हत्या करने वाले को 10 लाख डॉलर का इनाम दिया जाएगा।

ये पोस्टर बेहद ही खौफनाक स्थिति पैदा करता है कि राज्य के मुख्यमंत्री को उसके ही शासित राज्यों में खुले आम धमकी मिल रही हैं।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब की पुलिस भी सक्रिय है। यह पोस्टर पब्लिक गाइड मैप पर चस्पा किया गया था। खास बात यह है कि आरोपी की तरफ से लगाए गए पोस्टर पर किसी भी तरह के नंबर का जिक्र नहीं था। केवल ईमेल आईडी लिखी गई थी।

फिलहाल पुलिस ने मुस्तैदी के साथ आरोपी को पकड़ने के लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच के साथ ही ईमेल आईडी को साइबर पुलिस को सौंप दिया है। जांच से इतर ये मामला अमरिंदर की छवि को लेकर कुछ गंभीर सवाल खड़े करता है।
कैप्टन अमरिंदर वही मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने केंद्र द्वारा पारित कृषि कानूनों को लेकर अपनी पार्ट कांग्रेस के भविष्य के लिए राजनीतिक मुहिम चलाई।

उन्होंने किसानों को आगे करके उनके आंदोलन को पीछे से समर्थन दिया है। मोदी सरकार का मुखरता से विरोध करने वालों में अमरिंदर सबसे आगे थे, लेकिन किसानों के आंदोलन की अराजकता ने कैप्टन साहब के हाथ पैर फुलवा दिए और वो ही इस आंदोलन के खत्म होनेवाले की बात करने लगे। किसान आंदोलन में खालिस्तानी समर्थकों की अराजकता से लेकर पीएम मोदी को मारने और हिंदुओं के प्रति दुर्भावना की बातें होने लगीं।

ऐसे में अमरिंदर भी इसे खत्म करना चाहते हैं, लेकिन किसानों का आंदोलन अब कैप्टन अमरिंदर सिंह हाथों से निकल चुकी है।

ऐसे में विश्लेषक ये मान रहे हैं कि कैप्टन का खेला गया, दांव अब उन पर ही भारी पड़ गया है। उसी का प्रतिबिंब अब दिखने लगा है, जिसके चलते अमरिंदर को मारने के लिए कुछ असमाजिक तत्व धमकियां देने लगे हैं और अमरिंदर की छवि पूर्णतः बर्बाद हो चुकी है

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