ट्रंप की भाषा में मैक्रों कनाडा से डील कर रहे, बाकी देशों को भी इससे सीखना चाहिए

 


फ्रांस ने आर्थिक उदारीकरण और वैश्वीकरण को नकारते हुए आर्थिक राष्ट्रवाद का रास्ता अख्तियार किया है, जो बताता है कि इमैनुएल मैक्रॉन पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रास्ते पर चल रहे हैं। दरअसल, Carrefour SA जो फ्रांस की सबसे बड़ी रिटेल कंपनी है, जो फ्रांस की खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है, उसे कनाडा की कंपनी द्वारा खरीदा जाना था। इस प्रक्रिया को सरकारी हस्तक्षेप के बाद रोक दिया गया।

Carrefour S.A फ्रांस का सबसे बड़ा प्राइवेट रोजगारदाता है, जो देश की 20 प्रतिशत खाद्य सप्लाई को नियंत्रित करता है। ऐसे में इसका अधिग्रहण यदि कनाडा की कंपनी द्वारा किया जाता है तो यह फ्रांस में खाद्य सुरक्षा के साथ ही रोजगार की गारंटी के लिए भी चिंताजनक हो जाएगा।

फ्रांस के वित्त मंत्री Bruno Le Maire ने कहा “स्वास्थ संकट ने हमें सिखाया की खाद्य सुरक्षा अमूल्य है”। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि फ्रांस इस डील के खिलाफ है एवं सरकार अपनी इन्वेस्टमेंट स्कीइंग के जरिये भी इस निवेश और अधिग्रहण को रोकेगी। उन्होंने कहा “यह विनम्र किंतु दृढ़ और स्पष्ट ना है…..खाद्य संकट सभी विकसित देशों के लिए एक रणनीतिक चुनौती है।”

कोरोना काल के दौरान फ्रांस को खाद्य संकट का सामना नहीं करना पड़ा क्योंकि उन्होंने इसकी पूरी व्यवस्था अपने देश के हाथों में रखी थी। इसी बात को आधार बनाकर फ्रांस कनाडा की कंपनी द्वारा अधिग्रहण का विरोध कर रहा है। उन्होंने कहा कि “हम वितरण अपने हाथों में रखने पर खुश थे, विशेष रूप से मार्च में पहली बार लॉकडाउन के दौरान, जब हमने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर रखी थी, उस समय मैंने यह सीख ली कि खाद्य सुरक्षा वास्तव में हमारे देश के लिए रणनीतिक मुद्दा है और हम एक बड़े फ्रेंच वितरक का स्वामित्व नहीं छोड़ सकते।”

वास्तविकता यह है कि कोरोना ने दुनिया को यह बता दिया है कि वैश्वीकरण की कमियां क्या हैं। विशेष रूप से सप्लाई चेन का कुछ देशों में केंद्रीकरण देशों के लिए खतरनाक है। ऐसे में हर देश वैश्विक उदारवाद के बजाए अपने देश के हितों को ध्यान में रखकर फैसले कर रहा है और फ्रांस इससे अछूता नहीं है।

वैश्विक उदारवाद का झंडा हमेशा से पश्चिमी देशों द्वारा बुलंद रखा गया था। किंतु वैश्वीकरण की सोच के बजाए आर्थिक राष्ट्रवाद की ओर जाने का फैसला सबसे पहले डोनाल्ड ट्रम्प ने किया था। उन्होंने सस्ते सप्लाई चेन और आर्थिक लाभ से अधिक महत्व राष्ट्रीय सुरक्षा को दिया था, जिसके चलते अमेरिका और चीन का ट्रेड वॉर हुआ था। उस वक्त आर्थिक मामलों के जानकार उनकी नीतियों की आलोचना कर रहे थे, तथा इसे वैश्विक अर्थतंत्र के लिए खतरा बता रहे थे। किंतु कोरोना ने अंततः सभी देशों को वैसी ही नीतियां अपनाने को मजबूर कर दिया है।

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