अशोक गहलोत सोनिया के इकलौते वफादार बचे हैं, अब ये केरल कांग्रेस कमेटी का नेतृत्व करेंगे

  


देश के सबसे पुराने नेहरू गांधी परिवार की राजनीतिक पार्टी कांग्रेस किसी कॉरपोरेट कंपनी की तरह ही चलती है। इसके बावजूद अब पार्टी के अपने ही नेता गांधी परिवार के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। इसे काउंटर करने के लिए पार्टी में गांधी परिवार के पास केवल एक ही भरोसेमंद शख्स बचा है, वो हैं राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत। वो पार्टी के हर उस नेता के विरोध में खड़े हो जाते हैं जो कि गांधी परिवार पर सवाल खड़े करता है और इसीलिए सोनिया की अध्यक्षता में हुई वर्किंग कमेटी की बैठक में अशोक गहलोत को ईनाम दिया गया है। उन्हें केरल कांग्रेस कमेटी का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई है।

सभी को याद है कि जब कांग्रेस के बागी 23 नेताओं ने नए अध्यक्ष को चुनने की बात कहते हुए अध्यक्षा सोनिया की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए थे। इस दौरान अशोक गहलोत ने ही पार्टी के इन नेताओं को लताड़ा था। यही नहीं, कपिल सिब्बल से लेकर आनंद शर्मा तक के नेता जब भी पार्टी के मसलों पर बगावती रुख अपनाते हैं, तो अशोक गहलोत पूरे दम-खम के साथ सोनिया गांधी समेत पूरे गांधी परिवार को बचाने के लिए टूट पड़ते हैं और अब उन्हें इस वफादारी का ईनाम मिल रहा है।

हाल ही में हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग हुई तो एक बार फिर अशोक गहलोत सोनिया विरोधी खेमे पर बरस पड़े। इसका उन्हें इसी मीटिंग में ईनाम भी मिल गया और ईनाम के तौर पर उन्हें केरल विधानसभा चुनाव के दौरान केरल की कांग्रेस ईकाई का कर्ताधर्ता बनाया गया है। उनके साथ पार्टी ने अन्य दो आब्जर्वर और नियुक्त किए हैं जो कि केन्द्र और राज्य की ईकाई के बीच चुनाव की रणनीति और उम्मीदवारों के चयन में मध्यस्थता करेंगे।

अशोक गहलोत को मिली ये नई जिम्मेदारी इस बात का संकेत है कि पार्टी में सोनिया से नजदीकी उनके लिए एक फायदे का सौदा साबित हो रही है। हाल ही में उन्होंने पार्टी में अपने बढ़ते कद को लेकर और पार्टी के खिलाफ बोलने वालों के खिलाफ काफी कुछ कहा था और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं को नसीहत दी थी। उन्होंने कहा था, ‘पार्टी ने हमें बहुत कुछ दिया है। हम आज जो भी हैं जिस भी मुकाम पर हैं वो पार्टी के कारण ही हैं।’ हालांकि, इस बयान के बाद पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा  ने कहा था, ‘हमने भी इस पार्टी के लिए बहुत कुछ किया है। मैंने इस पार्टी को अपने 42 साल दिए हैं।’

साफ है कि ये लड़ाई कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं के बीच नहीं है, बल्कि ये लड़ाई पूरे बागी खेमे और गांधी परिवार के बीच की है जिसमें गहलोत गांधी परिवार के लिए एक रक्षाकवच बन कर खड़े हैं और इसीलिए अब सोनिया गांधी द्वारा उन्हें ईनाम दिए जा रहे हैं, जिसका उदाहरण केरल की उन्हें मिली नई जिम्मेदारी है।

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