कपिल सिब्बल, वो मायूस कांग्रेसी नेता जिन्हें पार्टी ने अध्यक्ष बनने का अवसर नहीं दिया


कांग्रेस अपने अध्यक्ष पद को लेकर राहुल गांधी को फिर से लॉन्च करने की तैयारी कर रही है, लेकिन पार्टी का एक सिपाही इस कदर रूठ चुका है कि वो अब पार्टी की लानत-मलामत करने पर उतर आया है, ये नेता कोई औऱ नहीं बल्कि कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल हैं, उन्होंने अब सीधा सोनिया गांधी पर ही निशाना साधते हुए कहा कि वो भी लोकतांत्रिक ढंग से चुनाव कराने की बात से पीछे हट चुकी हैं। कुछ लोग तो ये भी कह रहे हैं कि वो खुद ये पद चाहते थे, लेकिन जब उन्हें नहीं मिल रहा है, तो वो पार्टी के खिलाफ बात करन लगे हैं।

कांग्रेस के दिन तो उसी दिन से बुरे हो चुके थे, जब कपिल सिब्बल समेत 23 वरिष्ट नेताओं ने पार्टी में अध्यक्ष पद के चुनाव और अनियमितता को लेकर सोनिया गांधी को पत्र लिखा था। ये उसी दिन तय हो गया था कि पार्टी की उठा-पटक अब सामने आएगी, जो हो भी रहा है। इस मुद्दे पर सबसे मुखर बोलने वाले केवल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल हैं। कुछ ऐसा ही बम अब उन्होंने एक बार फिर फोड़ा है।

कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर उन्होंने  सोनिया गांधी को लेकर अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “सोनिया गांधी ने पार्टी नेताओं के साथ खुली बातचीत कर आंतरिक चुनाव कराने का वादा किया था। करीब एक महीने बीतने के बाद भी अभी तक यह साफ नहीं हो पा रहा है कि ये चुनाव कब कराए जाएंगे।।

कांग्रेस नेताओं का पार्टी से मोहभंग हो रहा है, इसपर जोर डालते हुआ उन्होंने कहा, ‘जिन लोगों को लगता है कि ये पहले की तरह ही एर मजबूत राजनीतिक ताकत है और वो सब कर सकते हैं और पार्टी फिर से पार्टी पटरी पर आने लगी है। मुझे लगता है, अलग-अलग राज्यों में क्या हो रहा है, इस पर ध्यान देने की जरूरत है। पार्टी को लेकर लोग मायूस हैं, नेताओं का पार्टी से मोहभंग हो रहा है। मैं दिल्ली के बारे में बात कर सकता हूं, कई नेता मेरे पास आए हैं और दिल्ली में प्रक्रियाओं के बारे में गंभीर चिंता व्यक्त की है और वे चाहते हैं कि पार्टी तेजी से कार्य करे। पर अभी तक हमें उस तरह की प्रतिक्रिया नहीं मिली, जिसकी हम उम्मीद कर रहे थे।’

सोनिया के प्रति कपिल सिब्बल का रवैया कभी-भी इतना तीखा नहीं रहा जितना इस बार हुआ है। ये इस बात का उदाहरण है कि वो पार्टी से अपना मुंह मोड़ चुके हैं और पार्टी में होते हुए भी पार्टी के लिए मुसीबत ही खड़ी कर रहे हैं।

उन्होंने राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने को लेकर कहा, “हम चर्चाओं-अटकलों का जवाब नहीं देते, हम वास्तविकता का जवाब देते हैं। जब चर्चा के टेबल पर होंगे तो हम इसका जवाब देंगे।” इसके बाद राहुल की वापसी से पार्टी में कुछ बदलाव होगा या नहीं इसपर उन्होंने कहा, मुझे इस बारे में पता नहीं है, मुझे लगता है कि सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि पार्टी में किस तरह से संविधान की प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है। इसमें कांग्रेस के सभी महत्वपूर्ण लोगों के साथ विचार विमर्श भी काफी अहम है। साफ है कि सिब्बल पार्टी के रवैए से खुश नहीं हैं।

23 बगावती नेताओं के पत्र लिखे जाने के बाद कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल की नीति अपनाते हुए कहा था कि अब पार्टी में चुनाव के जरिए ही अध्यक्ष चुना जाएगा। इसके विपरीत कांग्रेस राहुल को ही अध्यक्ष बनाने की नीति पर काम कर रही थी। पहले राहुल को अध्यक्ष बनाने के लिए पार्टी के बगावती नेताओं को राहुल के नाम पर सहमति के लिए तैयार किया और फिर अंदरखाने लगभग ये तय कर लिया है कि राहुल ही अध्यक्ष होंगे। दिलचस्प बात ये भी है कि कपिल सिब्बल ही एक ऐसे नेता थे, जो हाल ही में हुई सीडब्ल्यूसी की बैठक में उपस्थित नहीं थे, वो दुबई की यात्रा पर थे।

अध्यक्ष पद को लेकर कपिल सिब्बल लगातार अपने बगावती सुर दिखाते हैं जिसके बाद ये भी कहा जा रहा है कि उन्हें अध्यक्ष पद नहीं मिला। इसीलिए वो ऐसी बगावत कर रहे हैं, क्योंकि वो कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं जिनके पास राजनीतिक अनुभव की कमी नहीं हैं लेकिन सारी तवज्जों केवल राहुल को ही मिल रही हैं।

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