ट्रम्प प्रकरण से सचेत हुआ ऑस्ट्रेलिया, अब कसेगा सोशल मीडिया कंपनियों पर नकेल


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बड़ी इंटरनेट टेक कंपनियों जैसे ट्विटर द्वारा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ब्लॉक करने के चौंकाने वाले निर्णय की दुनिया भर में आलोचना हो रही है। अब ऐसा लगता है कि इन बड़ी कंपनियों के इस तरह से बढ़ते एकाधिकार को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने सोशल मीडिया दिग्गजों पर नकेल कसना शुरू कर दिया है।

ऑस्ट्रेलिया के कार्यवाहक प्रधानमंत्री Michael McCormack ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर प्रतिबंध लगाने के लिए ट्विटर को फटकार लगाई है। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि ऑस्ट्रेलिया के कोषाध्यक्ष Josh Frydenberg ने भी कहा कि वह ट्रम्प पर प्रतिबंध लगाने के ट्विटर के फैसले से “असहज” थे। इस बीच, Australian Competition and Consumer Commission (ACCC) ने सोशल मीडिया पर किस तरह का कटेंट स्वीकार्य है, इसे तय करने के लिए स्पष्ट नियमों को लागू करने का सुझाव दिया है।

McCormack, जो ऑस्ट्रेलियाई प्रधान मंत्री स्कॉट मॉरिसन के एक सप्ताह की छुट्टी पर जाने के बाद प्रधानमंत्री का कार्यभार संभाल रहे हैं, उन्होंने एबीसी रेडियो को बताया कि यह टेक कंपनियों का काम नहीं है कि लोग किसकी आवाज सुने।

McCormack ने कहा, “मैं उस तरह के सेंसरशिप पर विश्वास नहीं करता।”

कार्यवाहक ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने यह भी कहा, “बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्होंने ट्विटर पर बहुत सारी बातें कही हैं लेकिन उन्हें उस तरह की सेंसरशिप नहीं झेलनी पड़ी।”

बता दें कि McCormack यहाँ पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन का जिक्र कर रहे थे। पिछले महीने, चीनी प्रवक्ता ने एक झूठी तस्वीर पोस्ट की थी जिसमें एक ऑस्ट्रेलियाई सैनिक द्वारा एक बच्चे के गले को काटते हुए दिखाया गया था। लिजियन द्वारा फैलाये गए इस फर्जी खबर को ट्विटर पर खुलेआम प्रचारित किया गया।

चीनी प्रवक्ता के आधिकारिक हैंडल पर अभी भी यह ट्वीट सबसे ऊपर है। लिजियन पर प्रतिबंध तो दूर की बात है, ट्विटर ने तरह से झूठ को हटाने की भी जुर्रत नहीं की है।

 

ऑस्ट्रेलिया के कार्यवाहक पीएम ने कहा, “अब, तक इसे नहीं हटाया गया है, और यह गलत है। यदि आप डोनाल्ड ट्रम्प के ट्विटर को हटा रहे हैं, तो बारीकी से उस फोटो के बारे में भी सोचे जिसे पहले ही हटा लिया जाना चाहिए था। ”

लेकिन ट्विटर ही एकमात्र सोशल मीडिया दिग्गज नहीं है जिसने ट्रम्प को प्रतिबंधित किया है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट सभी ने ट्रम्प पर अस्थायी रूप प्रतिबंध लगा दिया है। ट्रम्प समर्थकों के बीच लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Parler को भी गूगल, एप्पल और अमेज़ॅन ने अपने सर्वर से हटा दिया दिया है। Parler के सीईओ John Matze ने कहा कि यह इन बड़ी कंपनियों का दोहरा मापदंड है।

ऑस्ट्रेलिया हालांकि, सोशल मीडिया दिग्गजों को ऐसे ही मनमानी नहीं करने देगा। ACCC जो ऑस्ट्रेलिया में वॉचडॉग की भूमिका निभाती  है, वह ऑस्ट्रेलिया में Google और Facebook की शक्ति पर लगाम लगाने के लिए बड़े पैमाने पर काम कर रही है। यह एक कोड भी लागू करने जा रही है जो दोनों कंपनियों को कटेंट के लिए मीडिया प्रकाशकों को भुगतान करने के लिए मजबूर करेगा।

अब, ऑस्ट्रेलिया सोशल मीडिया दिग्गजों की बढ़ती शक्तियों के बारे में चिंतित है क्योंकि जब मन तब ये कंपनियाँ अपने हिसाब से फ्री स्पीच को सेंसर कर देती हैं। ACCC के अध्यक्ष रॉड सिम्स ने यहां तक ​​कहा कि ऑनलाइन सामग्री को नियंत्रित करने की बात आने पर राजनीतिक नेताओं को हर बार प्रश्न का सामना करना पड़ा।

इस बीच, क्वींसलैंड संसद के सदस्य George Christensen ने ट्रम्प के प्रतिबंध के जवाब में एक ऑनलाइन याचिका शुरू की है। याचिका में लिखा है कि,”हम यह पूछते हैं कि, आप यानि संचारमंत्री पॉल फ्लेचर ऐसा कानून बनाए जिससे ट्विटर, फेसबुक, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं को किसी भी वैध कटेंट के पोस्ट करने पर किसी भी प्रकार से सेंसर, सस्पेंड या shadow ban न लगा सके।“

ऑस्ट्रेलिया की संघीय संसद वर्तमान में इंटरनेट से “हिंसक” कटेंट को हटाने के लिए मसौदा कानूनों पर बहस करने के लिए खुद को तैयार कर रही है। अब, यह पूरी तरह से संभव है कि ऑस्ट्रेलिया सरकार एक नया कानून लाए जिससे यह तय किया जा सके कि किस कटेंट को हटाया जाए औए किसे नहीं। इसके अलावा, कानून यह भी तय कर सकता है कि कौन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रहता है और किस पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

ऑस्ट्रेलिया को पता है कि कैसे फ्री स्पीच के पक्ष में खड़ा होना है, और इसलिए डोनाल्ड ट्रम्प पर प्रतिबंध के बाद वह बड़ी तकनीक कंपनियों पर लगाम लगाने की दिशा में कदम उठा रही है।

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