लंबे वक्त तक स्तनपान कराने से मां-बच्चे पर होता है यह असर, जानें जरूरी बातें

  

मां का दूध नवजात के लिए अमृत समान होता है। यहीं वजह है कि जन्म के छह माह तक सिर्फ मां का दूध ही पिलाने की सलाह दी जाती है। यहां तक कि इस अवधि के दौरान बच्चे को मां के दूध के सिवाय पानी भी नहीं देने की बात कही जाती है। बच्चों की छह माह तक उनकी सारी जरूरते स्तनपान करने से ही पूरी हो जाती हैं। लेकिन कुछ माताएं ऐसी हैं जो अपने एक साल, दो साल या उससे अधिक समय तक स्तनपान कराती हैं। लंबे समय तक स्तनपान कराने को लेकर कई तरह के मत हैं। यहां हम आपको लंबे समय तक स्तनपान कराने से मां-बच्चे पर क्या फर्क पड़ता है इसके बारे में विस्तार से बता रहे हैं।

  • बाल एवं स्त्री रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चा अगर एक साल या उससे अधिक वक्त तक मां का दूध पीता है तो उसे कई पोषक तत्व मिलते रहते हैं। मां के दूध में विटामिन ए, प्रोटीन, कैल्शियम, फैट एवं अन्य पोषक तत्व पाए जाते है जो बच्चे की सेहत के लिए काफी मुफीद होते हैं।
  • विशेषज्ञों के मुताबिक मां का दूध बच्चे के लिए किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं है। ऐसे में अगर लंबे समय तक मां के दूध का सेवन करता है तो उसका इम्युन सिस्टम काफी मजबूत होता है। ऐसे बच्चे मौसमी बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं और भविष्य में भी गंभीर बीमारियों को भी मात दे देते हैं। इतना ही नहीं ऐसे बच्चों का बड़े होने पर जल्दी कोलेस्टॉल लेवल और ब्लड प्रेशर नहीं बढ़ता। साथ ही बीमार पड़ने पर रिकवरी दर भी काफी बेहतर रहती है।
  • वहीं यह भी तथ्य सामने आ रहे हैं कि लंबे समय तक स्तनपान करने वाले बच्चों को मस्तिष्क काफी तेज होता है। ऐसे बच्चों में आईक्यू लेवल औरों की अपेक्षा काफी बेहतर होता है। डॉक्टर बताते हैं कि ब्रेस्ट फीड करवाने से बच्चों को ओमेगा 3 फैटी एसिड और डीएचए मिलता है, जो मानसिक विकास के काफी कारगर होते हैं।
  • लंबे समय तक स्तनपान कराना मां और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद है। इससे बच्चे को जहां पोषक तत्व मिलता रहता है, वहीं मां की कैलोरी खर्च होती रहती है। क्योंकि बच्चे के जन्म के बात मां का वजन काफी तेजी से बढ़ जाता है। ऐसे में लंबे समय तक स्तनपान कराने से मां का वजन नियंत्रित रहता है। स्त्री रोग विशेषज्ञ का मानना हे कि लंबे समय तक स्तनपान कराने के सिर्फ फायदे हैं। बस मां का खानपान बेहतर होना चाहिए। खानपान में कमी होने पर मां की सेहत पर इसका कु-प्रभाव पड़ता है।
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