बाइडन प्रशासन अमेरिकी सेना में “नस्लवादी और चरमपंथी” तत्वों को हटाने जा रहा हैं, ये विद्रोह का कारण बन सकता है

 


अमेरिका में राष्ट्रपति जो बाइडन की सरकार बन चुकी है और आते ही उनका प्रशासन एक के बाद एक कई बड़े फैसले ले रहा है, जो आगामी चार वर्षों में बाइडन प्रशासन की नीतियों की रूपरेखा तैयार करेंगे! इन्हीं में से एक बड़े फैसले में अमेरिकी रक्षा मंत्री के पद के लिए मनोनीत रिटायर्ड आर्मी जनरल Lloyd Austin ने अमेरिकी सेना को “नस्लवादी और अतिवादी” लोगों से मुक्त करने का वचन लिया है। उन्होंने कहा है कि वे अपनी सेना में Diversity को बढ़ावा देंगे और सेना में ऐसा माहौल बनाने की दिशा में काम करेंगे जिससे सभी लोगों को सेना में अपनी सेवाएँ प्रदान करने का अवसर मिले! साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का काम अमेरिका को दुश्मनों से बचाना है, लेकिन अगर सेना के अंदर ही कुछ दुश्मन पैदा होते हैं तो वे अपना काम सही से नहीं कर पाएंगे।

यहाँ बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर Austin नस्लवादी और अतिवादी तत्व मानते किसे हैं? अमेरिकी सैनिकों में राजनीतिक विचारधारा के आधार पर बंटवारा कभी नहीं देखने को मिला है, लेकिन इतना स्पष्ट है कि बाइडन प्रशासन आने वाले दिनों में अमेरिकी सेना में से ट्रम्प के समर्थकों को बाहर करने की दिशा में कदम उठा सकता है। हाल ही में CNN पर बोलते हुए Democrat सांसद Steve Cohen ने तब बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था जब उन्होंने कहा कि ट्रम्प के लिए वोट करने वाले National Guard के सैनिकों को देश की सुरक्षा के लिए “खतरा” घोषित कर देना चाहिए! Cohen का बयान सुनकर यह स्पष्ट होता है कि Austin जिन तथाकथित नस्लवादी और अतिवादी तत्वों की बात कर रहे हैं, उनका असल मतलब वहाँ ट्रम्प के समर्थकों से है।


किसी भी राष्ट्रवादी सेना की तरह ही अमेरिका के सैनिकों के बीच भी आपसी सौहार्द राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर कायम रहा है। हालांकि, जिस प्रकार अब बाइडन प्रशासन के लोग और Democrat सांसद चुन-चुन कर ट्रम्प के समर्थकों पर Crackdown करने की बात कर रहे हैं, वह अमेरिकी सेना में राजनीतिक विचारधारा के आधार पर बड़ा बंटवारा कर सकता है।

बाइडन प्रशासन को डर है कि Democrat सरकार की आगामी नीतियों के खिलाफ अमेरिकी सेना के ये “नस्लवादी और अतिवादी तत्व” कहीं विरोध ना छेड़ दें! बाइडन सरकार को डर है कि प्रशासन की नीतियों को अमेरिकी सैनिकों का समर्थन मिलेगा या नहीं! बाइडन की नीतियाँ अमेरिकी सैनिकों को दोबारा Middle East और अफ़ग़ानिस्तान जैसे युद्ध से ग्रसित इलाकों में भेजने को मजबूर कर सकती हैं। अमेरिकी सैन्य नेतृत्व आमतौर पर ट्रम्प के खिलाफ ही रहा है। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि अमेरिका में Black Lives Protest के दौरान वे इसी कारण से अमेरिकी सेना का कुशलता से इस्तेमाल कर पाने में असफल रहे थे।

बाइडन प्रशासन का ट्रम्प-समर्थक सैनिकों के विरोध में उतरना दिखाता है कि उनके इस कदम से अमेरिकी सेना में बंटवारा और बढ़ेगा, और अगर भविष्य में ट्रम्प समर्थकों के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई की जाती है, तो इसके कारण अमेरिकी सैनिकों में सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़ने की पूरी-पूरी आशंका है। बाइडन अमेरिकी सेना को ट्रम्प के “कट्टर समर्थकों” से मुक्त करना चाहते हैं ताकि अमेरिकी सेना को राजनीतिक प्रभाव से दूर रखा जा सके, लेकिन वे यह भूल रहे हैं कि उनके इस कदम से अमेरिकी सेना में ट्रम्प विरोधियों और Democrats का बोलबाला बढ़ जाएगा, जो कि ना सिर्फ अमेरिकी सेना में राजनीतिक प्रभाव को और बढ़ा देगा बल्कि अमेरिकी सेना में एक बगावत को भी जन्म दे सकता है। बाइडन अमेरिका के लोकतंत्र को मजबूत करने की आड़ में जो कदम चल रहे हैं, वह आखिर में अमेरिकी लोकतन्त्र की हत्या करने में बड़ी भूमिका निभाने की ताकत रखता है।

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