‘हमारी सोसाइटी से बाहर निकलो’, सभी मामलों के पार्ट टाइम एक्सपर्ट योगेन्द्र यादव को अपने ही लोग बेदखल कर रहे

  


कुछ लोग ऐसे होते हैं जो दुनिया के हर मुद्दे पर विशेषज्ञ बन जाते हैं। स्वराज्य इंडिया के नेता योगेन्द्र यादव का हाल भी कुछ ऐसा ही है, जो आजकल तथाकथित किसान आंदोलन में किसान नेता बनकर सिंघु बॉर्डर पर बैठे हैं। गणतंत्र दिवस के अवसर पर तथाकथित किसानों ने दिल्ली में जो अराजकता मचाई है उसके बाद अन्य किसान नेताओं की तरह ही योगेन्द्र यादव पर भी केस दर्ज किया गया है। वहीं अब उनके अपने ही इलाक़े के लोगों द्वारा उनका विरोध हो रहा है। लोग उन्हें उनके ही घर से निकालने पर तुले हैं जो दिखाता है कि फर्जी किसानों की बात करने वाले इस शख्स के खिलाफ उसके अपने ही लोग खड़े हो गए हैं।

किसान आंदोलन के नाम पर दिल्ली में अराजकता मचाने वाले तथाकथित किसानों के नेताओं में एक नाम योगेन्द्र यादव का भी है। योगेन्द्र यादव ने हर बार की तरह ही किसानों के मुद्दे पर भी जहर उगला है लेकिन अपनी आवाज में वामपंथ का जहर घोलने की उनकी आदत अब उन पर ही भारी पड़ी है क्योंकि उनकी ही सोसाइटी के लोग उन्हें देश द्रोही बताने लगे हैं और उनके फ्लैट को खाली कराने की मांग करने लगे हैं। 26 जनवरी की घटना के बाद से ही योगेन्द्र यादव के घर के आस-पास के लोगों का गुस्सा उन पर फूट रहा था और अब वो सामने भी आ रहा है।

देश के लगभग सभी मामलों के पार्ट टाइम विशेषज्ञ योगेन्द्र यादव जब भी टीवी या किसी मंच पर बोलते हैं तो अपनी सहज भाषा में लोगों को देश के प्रति भड़काते ही है। ऐसे में उनको देश द्रोही बताते हुए गौतम अग्रवाल नाम के एक शख्स ने कहा है कि योगेन्द्र यादव से अब उनका घर भी छिन सकता है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, भारत विरोधी गतिविधियों के लिए किसान यूनियन नेता योगेंद्र यादव के निवास के बाहर आईपी एक्सटेंशन दिल्ली के निवासियों द्वारा विरोध प्रदर्शन हो रहा है। लोगों ने अपनी सोसाइटी के प्रबंधन समिति से कहा है कि वह अपना फ्लैट खाली करवा लें क्योंकि वह भारत के लिए खतरा हैं।

योगेन्द्र यादव की इतनी बड़ी आलोचना शायद ही इससे पहले कभी भी हुई हो। खबरों के मुताबिक लोग उनके घर पर “योगेन्द्र यादव मुर्दाबाद” जैसे नारे लगा रहे हैं। फेक किसानों की अराजकता के बाद अब लोग योगेन्द्र यादव के खिलाफ बयान बाजी करने के साथ ही उनके पोस्टरों को अपने पैरों से कुचल रहे हैं। साफ है कि जो योगेन्द्र यादव दिल्ली में अराजकता फैलाने वाले किसान नेताओं के साथ शामिल थे, उनके आस-पास के लोग तक उन्हें देशद्रोही जैसी संज्ञा दे रहे हैं जो कि उनके लिए एक बड़ा झटका है।

योगेन्द्र यादव कृषि, चुनावी रणनीतिकार, राजनीतिक, आर्थिक से लेकर अब दंगों के विश्लेशषक भी बन चुके हैं। यही कारण है कि अब उनका विरोध इतने बड़े स्तर पर किया जा रहा है। राकेश टिकैत की तरह ही उन्होंने भी रोने की नौटंकी शुरू कर दी और लोगों की सहानुभूति हासिल करने की कोशिश की, लेकिन जनता अब उन्हें भाव नहीं दे रही है।

26 जनवरी को लाल किले पर हुई हिंसा और पुलिस के साथ किसानों के उग्र रवैए के बाद सिंघु से लेकर गाजीपुर बॉर्डर तक पर किसानों के खिलाफ स्थानीय नागरिक सक्रिय हो गए हैं, और इन तथाकथित किसानों को आंदोलन को खत्म करने का अल्टीमेटम दे रहे हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति योगेन्द्र यादव की भी हो गई है। आम जनता देश के प्रति जहर घोलने वाले योगेन्द्र यादव जैसे दंगाई मानसिकता वाले शख्स को अब अपने बीच रहते हुए कतई नहीं देखना चाहते हैं।

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