‘साइड इफेक्ट हुआ तो देंगे मुआवजा’, कोरोना वैक्सीन को लेकर उठते सवालों पर भारत बायोटेक का ऐलान

  


भारत में कोरोना वायरस के लिए विश्व का सबसे बड़ा वैक्सीन ड्राइव शुरू हो चुका है। इसी बीच वैक्सीन को लेकर भारत बायोटेक ने बड़ा ऐलान किया है। वैक्सीन बनाने वाली इस कंपनी का कहना है कि उसके कोवैक्सीन के लगाए जाने पर अगर कोई साइडइफैक्ट सामने आते हैं तो कंपनी मुआवजा देगी। यह कोई मामूली बात नहीं क्योंकि भारत सरकार ने भारत बायोटेक को कोरोना वैक्सीन की 55 लाख डोज का ऑर्डर दिया है। ऐसे में कंपनी की तरफ से इस तरह का ऐलान वैक्सीन को लेकर उसके आत्मविश्वास दिखाता है।

भारत बायोटेक का कहना है कि वैक्सीन दिए जाने वाले व्यक्ति को एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी करना होगा और किसी अनहोनी की स्थिति में कंपनी की तरफ से मुआवजा दिया जाएगा। इस कंपनी का कहना है कि कोवैक्सीन के लगाए जाने पर किसी लाभार्थी को कोई स्वास्थ्य समस्या होती है तो सरकारी अस्पताल में देखरेख की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। शुक्रवार को जारी कंसेंट फॉर्म में लिखा है कि वैक्सीन की वजह से कोई भी गंभीर साइड इफेक्ट्स होने की स्थिति में लाभार्थी को सरकार के तय किए हुए और अधिकृत अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाएं दी जाएंगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, वैक्सीन प्राप्त करने वाले को एक फैक्ट शीट और बुरे परिणामों से जुड़ा फॉर्म दिया जाएगा। इस फॉर्म में लाभार्थी को शुरुआती 7 दिनों में नजर आने वाले लक्षणों को लिखना होगा।

वैक्सीन निर्माता का कहना है कि क्लीनकल ट्रायल के चरण 1 और चरण 2 में, कोवाक्सिन ने COVID- 19 के खिलाफ एंटीडोट्स  उत्पन्न करने की क्षमता को देखा गया है। भारत बायोटेक ने यह ऐलान उन लोगों के लिए किया है जो कोरोना वैक्सीन को लेकर संदेह कर रहे हैं और तमाम तरह के सवाल उठा रहे हैं। भारत बायोटेक ऐलान किया है कि यह वैक्सीन बिल्कुल सुरक्षित और कारगर है।

बता दें कि भारत ने पुराने, परखे हुए तरीके को ही अपनाकर वैक्सीन का निर्माण किया है। पश्चिम में बनी Moderna और Pfizer की वैक्सीन, कोरोना वायरस के ही समान दूसरे वायरस, जो मनुष्य के लिए कम घातक हैं, उसको शरीर में इंजेक्ट कर देती है। वहीं भारत में बनी कोवैक्सीन कोरोना के मृत वायरस को शरीर में इंजेक्ट करती है। इसके बाद शरीर इन मृत वायरस के जरिये कोरोना से लड़ने की क्षमता पैदा कर लेता है। ये कुछ वैसा ही है जैसे किसी युद्ध के पूर्व उसकी मॉक ड्रिल की जाए। यह तरीका बहुत पुराना है और चेचक, रेबीज जैसी बीमारियों के विरुद्ध कारगर रहा है। महत्वपूर्ण यह है कि इस तरीके के बारे में विश्व में सर्वाधिक जानकारी और अनुभव भारतीय वैज्ञानिकों के ही पास है।

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