रेपिस्टों से पीड़िता को बचाने वाली असली हीरो का CM ने किया सम्मान


भोपाल। CM शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को बेटियों और महिलाओं को बचाने वाले समाज के असली हीरो का सम्मान किया. मिंटो हॉल में आयोजित वर्चुअल सम्मान समारोह में सागर की श्रीबाई को सम्मानित किया गया. श्रीबाई ने तीन महीने पहले गैंगरेप पीड़िता को बचाया था, जिसके लिए सोमवार को उन्हें सम्मानित किया गया है. मुख्यमंत्री से वर्चुअल चर्चा में श्रीबाई ने पूरा घटनाक्रम बयां किया.

बिना कपड़ों के दौडे़ आ रही थी पीड़िता

श्रीबाई ने बताया कि 27 सितंबर की दोपहर वे अपने खेत में काम कर रही थीं. इसी दौरान अचानक उन्हें एक महिला के चीखने की आवाज सुनाई दी. महिला अपने दो बच्चों के साथ चीखते हुए उनके पास आई. महिला के शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था.

श्रीबाई बनी ढाल

श्रीबाई ने बताया पीड़िता के पीछे चार लोग दौड़ते आ रहे थे. मैंने उन लोगों से चिल्ला कर कहा कि क्यों इसको परेशान कर रहे हो, यह सुनकर 3 लोग तो पीछे लौट गए. लेकिन एक शख्स आगे आया और पेट्रोल की बोतल दिखाते हुए बोला बीच में से हट जा नहीं, तो तुम्हें भी जला दूंगा. यह सुनकर मैंने खेत में पड़ा डंडा उठाया और खेत में थोड़ी दूर काम कर रहे बेटे को जोर-जोर से बुलाया. आवाज सुनकर बेटा आ गया जिसके बाद वह आदमी भी भाग गया.

पीड़िता को दिए अपने कपड़े

आरोपियों को भगाने के बाद में श्रीबाई ने पीड़िता के बदन को ढकने के लिए उसे साड़ी दी. पीड़िता के साथ 2 साल और 6 महीने का बच्चा था. उन दोनों बच्चों को असली हीरो श्रीबाई ने दूध पिलाया. फिर इस घनटा की सूचना पुलिस को दी गई.

सीएम ने कहा, आपने किया अद्भुत काम

श्रीबाई के साहस को सुनकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आपने अद्भुत काम किया है. यही हमारी असली हीरो हैं, जो ढाल बनकर खड़ी हो गईं और उस बेटी को बचा लिया.

ऑटो चालक की सूझबूझ से बची बच्ची

कार्यक्रम में भोपाल के अन्ना नगर इलाके में रहने वाले मनोज गायकवाड़ का भी सम्मान किया गया. मनोज गायकवाड़ ऑटो चालक हैं, जिनकी सूझबूझ से एक 13 साल की बच्ची मानव तस्करी का शिकार होते-होते बच गई. कार्यक्रम में ऑटोचालक मनोज गायकवाड़ ने बताया कि पिछले दिनों ISBT से एक 13 साल की बच्ची रेलवे स्टेशन जाने के लिए ऑटो में बैठी. बच्ची ने बताया कि उसे हरियाणा जाना है. स्टेशन पहुंचने पर उसने थोड़ी देर रुकने के लिए कहा और ट्रेन का समय पूछने के लिए अंदर चली गई. बाहर आकर उसने बताया कि हरियाणा के लिए अभी कोई ट्रेन नहीं है और उसके पास पैसे भी नहीं है.

फोन पर बात करने से हुआ शक

बच्ची ने एक फोन नंबर पर उसकी बात कराई. फोन पर युवक ने कहा कि बच्ची के पास सोने की नाक की कील है, उसे बेचकर बच्ची को पैसा दे दो और हरियाणा की ट्रेन में बैठा दो. शक होने पर मनोज गायकवाड़ बच्ची को वापस अपने साथ ISBT लेकर आए और इसकी सूचना पुलिस को दे दी. पूछताछ में पता चला कि बच्ची को किसी युवक ने फोन पर बहला-फुसलाकर हरियाणा बुलाया था. बाद में बच्ची को परिजनों को सौंप दिया गया.

सीएम ने किया सलाम

मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर मनोज ने सूझबूझ नहीं दिखाई होती तो बच्ची का क्या हाल होता, यह हम सोच भी नहीं सकते.


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