“भाड़ में जाए EU”, बाइडन की विदेश नीति में EU के लिए कुछ खास अच्छा नहीं दिख रहा है

 


बाइडन प्रशासन ने Deputy Secretary of State के रूप में विक्टोरिया नूलैंड का चयन किया है। बाइडन के निर्णय की आधिकारिक घोषणा अब तक नहीं हुई है किंतु विक्टोरिया नूलैन्ड  का चयन लगभग तय है। नूलैंड अपने युद्धप्रिय स्वभाव के लिए विख्यात हैं। एक बार उन्होंने यूक्रेन में अमेरिका राजदूत से बात करते हुए अमेरिका के मुख्य सहयोगीयों, EU के देशों को “F**k EU” कह दिया था, जिसपर खासा विवाद हुआ था। उनका आना अमेरिका की विदेश नीति को कैसे प्रभावित कर सकता है, इसे समझना बहुत आवश्यक है।

विक्टोरिया  ओबामा प्रशासन में यूरोपीय मामलों को संभालती थीं। किंतु वे केवल डेमोक्रेटिक पार्टी से संबद्ध नहीं रहीं हैं। रिपब्लिकन पार्टी की बुश सरकार में भी उनका तात्कालिक उपराष्ट्रपति डिक चेनी से अच्छा संबंध था। वह उपराष्ट्रपति की विदेश मामलों की सलाहकार थीं। उपराष्ट्रपति डिक चेनी को अमेरिकी इतिहास के सबसे ताकतवर और सबसे अलोकप्रिय उपराष्ट्रपति के रूप में जाना जाता है।

अमेरिका द्वारा ईराक पर हुए हमले के पीछे नूलैंड और डिक चेनी की जोड़ी की सबसे बड़ी भूमिका थी। उस समय अमेरिका ने ईराक पर Weapon of mass destruction ‘WMD’ बनाने का आरोप लगाया था, तथा ईराक के तात्कालिक शासक सद्दाम हुसैन को हटा दिया था। इस ‘WMD’ थ्योरी के पीछे का दिमाग डिक चेन और नूलैंड का ही था। बाद में अमेरिका को वहाँ ऐसा कोई हथियार नहीं मिला, किंतु सद्दाम के जाने के बाद ईराक में अस्थिरता का ऐसा दौर शुरू हुआ जिसके कारण अंततः ISIS का जन्म हुआ।

इसके अलावा ओबामा प्रशासन में भी अपनी रूस विरोधी नीतियों के कारण नूलैंड में सीरिया के मसले पर रूस अमेरिका को युद्ध के कगार पर ला दिया था। अंत में ओबामा द्वारा सीरिया का मामला अपने हाथ में लेने के बाद ही वहाँ युद्ध टल पाया। ओबामा ने सीधे पुतिन से सहयोग प्राप्त किया, सीरिया की शांति के बदले ओबामा को ईरान के साथ न्यूक्लियर समझौता करने का मौका मिल पाया।

लेकिन रूस अमेरिका मित्रता पर नूलैंड का ग्रहण फिर लग गया, जब अमेरिका रूस के साथ यूक्रेन के संकट में फंस गया था। उस समय नूलैंड यूरोपीय मामलों को संभाल रही थीं, तथा इसी समय अमेरिका के समर्थन से EU ने यूक्रेन को एक आर्थिक समझौते का प्रस्ताव दिया। यूक्रेन के तात्कालिक राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच ने इसे अस्वीकार कर दिया था क्योंकि उनका मानना था कि प्रस्ताव EU के ही हितों को पूरा करेगा, यूक्रेन के नहीं।

वास्तव में विक्टर रूस समर्थक थे, और EU के प्रस्ताव को ठुकराकर उन्होंने रूस के साथ समझौता कर लिया। इसके बाद अमेरिका ने यूक्रेन के चुने हुए जनप्रतिनिधि को सत्ता से हटाने के लिए वहाँ व्यापक विद्रोह करवा दिया, जिसके चलते विक्टर को सत्ता छोड़नी पड़ी तथा यूक्रेन में गृहयुद्ध शुरू हो गया। उस समय EU प्रस्ताव के लिए यूक्रेन पर अत्यधिक दबाव बनाने के पक्ष में नहीं था, जिससे नूलैंड काफी नाराज थीं।

इसी समय अपनी खीज के कारण उन्होंने अमेरिकी राजदूत से बात करते समय “F**k EU” कहा था। उस समय जर्मन चांसलर मर्केल ने इसपर कड़ी आपत्ति जताई थी तथा ओबामा प्रशासन को इसके लिए माफी मांगनी पड़ी थी। अब इन्हीं विवादित कूटनीतिज्ञ, न्यूलैंड को बाइडन विदेश नीति निर्धारित करने वाला तीसरा सबसे प्रमुख पद दे रहे हैं।

एक ओर EU को इस बात की उम्मीद है कि बाइडन प्रशासन में अमेरिका के साथ उनके व्यापारिक टकराव सुलझेंगे। बाइडन के राष्ट्रपति के रूप में चुने जाने के बाद EU देशों की बैठक में EU ने इसकी उम्मीद जताई थी कि अमेरिका पुनः बहुध्रुवीय व्यापार की ओर लौटेगा। जर्मन वित्त मंत्री Peter Altmaier ने कहा था “हमें बहुत उम्मीद है एवं हम आशा करते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव दुनिया को बहुध्रुवीय व्यापार की ओर ले जाएगा और यह चुनाव संभवतः पूर्व के विवादों को दूर करेगा।”

नूलैंड की नियुक्ति के बाद यह नहीं लगता कि EU और अमेरिका के रिश्ते इतनी जल्दी सुलझेंगे, तब तक जब तक कि EU अमेरिका की भावी रूस विरोधी नीति का समर्थन शुरू करे। इस समय अमेरिका को EU को कैसे भी, चीन विरोधी धड़े में रखना है, किंतु नूलैंड इस कार्य में बाधक बन सकती हैं।

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