EU से UK के बाहर होने के बाद अंग्रेजी भाषा को हटाकर फ्रेंच को अपनाने का फ्रांस का प्रस्ताव

 


UK, जर्मनी और फ्रांस शुरू से ही यूरोपियन यूनियन के सबसे ताकतवर देशों में से एक रहे हैं। हालांकि, अब चूंकि Brexit के बाद UK यूरोपियन यूनियन से बाहर हो गया है, तो ऐसे में अब फ्रांस ब्लॉक में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए आक्रामक तेवर दिखाना शुरू कर चुका है। फ्रांस की ओर से यूरोपियन यूनियन के सांसद France Jamet ने मांग उठाई है कि EU से अंग्रेज़ी भाषा को बाहर किया जाये, क्योंकि अब UK तो EU का हिस्सा रहा ही नहीं है। स्पष्ट है कि फ्रांस अब EU से अंग्रेज़ी को बाहर कर फ्रेंच भाषा का कद बढ़ाना चाहता है, जो इस ब्लॉक में तीसरी सबसे ज़्यादा बोले जाने वाली भाषा है। फ्रेंच भाषा के कद बढ़ने से पूरे ब्लॉक में फ्रांस की सॉफ्ट पावर में भी इजाफ़ा होगा, जो EU का नेतृत्व करने के लिए फ्रांस को कूटनीतिक समर्थन प्रदान करेगा!

UK के बाहर होने के बाद अब जर्मनी और फ्रांस EU के दो सबसे ताकतवर देश बचे हैं। पारंपरिक तौर पर जर्मनी ही EU का प्रभावशाली नेता माना जाता रहा है। हालांकि, Macron के नेतृत्व में फ्रांस अब मर्कल-रहित जर्मनी को पछाड़ने की उम्मीद लगाए बैठा है। इसी वर्ष मर्कल जर्मन चांसलर के पद को छोड़ने वाली हैं, ऐसे में EU पर अपने प्रभाव बढ़ाने की मंशा से अभी से पहले फ्रेंच राजनेता सक्रिय हो गए हैं। Jamet के मुताबिक “UK के जाने के बाद भी अंग्रेज़ी ही ब्लॉक की सबसे प्रभावशाली भाषा है। बुरी बात यह है कि EU के संस्थान अब भी इसके प्रभाव को बढ़ाने ही पर ध्यान दे रहे हैं। हम यह भी देख रहे हैं कि EU की प्रक्रियाओं से जुड़े text को फ्रेंच भाषा में सबसे देरी से और सबसे सुस्ती के साथ translate किया जा रहा है। कई बार तो translators ही उपलब्ध नहीं होते हैं।”

फ्रेंच भाषा को ज़्यादा अहमियत दिलवाने के पीछे फ्रेंच राजनेताओं एक बड़ा मकसद यही है कि कैसे भी करके ब्लॉक में फ्रांस का दबदबा बढ़ाया जाये! भाषा के माध्यम से फ्रांस अपनी सॉफ्ट पावर बढ़ाना चाहता है। फ्रेंच दुनिया के 29 देशों में आधिकारिक भाषा मानी जाती है और अफ्रीका में इस भाषा का अच्छा खासा प्रभाव है। फ्रेंच भाषा UN की छः आधिकारिक भाषाओं में भी शामिल है। ऐसे में फ्रेंच भाषा को एक नया आयाम देकर फ्रांस यूरोप में सबसे ज़्यादा प्रभावशाली शक्ति बनना चाहता है। Macron भी फ्रेंच भाषा के प्रभाव को लेकर उत्साहित रहते हैं, ऐसे में वे भी आगामी वर्षों में फ्रेंच भाषा को बढ़ावा देने के लिए नई नीति लेकर आ सकते हैं। Macron तेजी से EU का नेतृत्व अपना हाथ में लेना चाहते हैं, और इसके लिए वे फ्रेंच भाषा को बड़ा हथियार बना सकते हैं।

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