हथियार निर्माता कंपनी के पूर्व निदेशक और Middle East में अशांति के जिम्मेदार ऑस्टिन बने US के रक्षा सचिव

 


अमेरिका के राष्ट्रपति का पद संभालने के कुछ दिनों बाद ही जो बाइडन खुद को अमेरिकी डीप स्टेट का हिस्सा साबित कर रहे हैं। अपने चारो तरफ महत्वपूर्ण पद पर उसी लॉबी के लोगों को बैठा रहे हैं जो किसी ना किसी प्रकार से युद्ध के लिए व्याकुल रहते हैं। उदाहरण के लिए उनके रक्षा सचिव, लॉयड जे ऑस्टिन  पर एक नज़र डाला जाए तो यह और स्पष्ट हो जाएगा। लॉयड का इतिहास हथियारों की बिक्री से जुड़ा हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि शपथ लेने से पहले ही ऑस्टिन ने स्पष्ट कर दिया था कि वह रूस और चीन से आने वाली चुनौतियों के जवाब में पश्चिमी एशिया में अमेरिकी सैन्य बलों की उपस्थिति की समीक्षा करेंगे।

दरअसल, हाल ही में प्रमुख हथियार विक्रेता Raytheon Technologies के सीईओ, Greg Hayes ने घोषणा की कि उनकी कंपनी ने “आक्रामक हथियार प्रणाली” की  519 मिलियन $ की अनुमानित बिक्री के लक्ष्य को रद्द कर दिया है। हालांकि कंपनी ने ग्राहक का खुलासा नहीं किया, लेकिन यह माना जा रहा है कि Hayes  रियाध को 7,500 Paveway bombs की बिक्री के बारे में बात कर रहे थे। Hayes ने अपनी ओर से संकेत दिया कि व्हाइट हाउस के प्रशासन में बदलाव के कारण यह नियोजित बिक्री को रोका गया।

तो यहां यह सवाल उठता है कि वास्तव में हो क्या रहा है?

जिओ पॉलिटिक्स में चीजें इतनी सरल नहीं हैं, जितनी वे लगती हैं।  एक ओर, यह माना जा रहा है कि यमन गृहयुद्ध के कारण और 2018 में अमेरिकी पत्रकार Jamal Khashoggi की हत्या के कारण बाइडन  रियाध से नाराज़ हैं। हालांकि, कहानी का दूसरा पक्ष भी है। भले ही Raytheon ने सऊदी अरब को हथियारों की बिक्री को रोक दिया है, लेकिन ऑस्टिन हथियारों के विक्रेता के साथ गहरे संबंध साझा करते हैं।

वास्तव में, अमेरिकी रक्षा सचिव ने 2016 में सैन्य सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद Raytheon के बोर्ड में सीट ले ली थी। मुआवजे के हिस्से के रूप में, पूर्व अमेरिकी सेना के जनरल को हथियार बेचने वाली प्रमुख और दो कंपनियों, Carrier Global Corp और Otis Worldwide Corp का स्टॉक दिया गया था, जो बंद हो गए थे।

अब ऑस्टिन को रक्षा सचिव के रूप में बाइडन द्वारा चुने जाने के बाद हथियार बेचने वाली कंपनी को छोड़ना पड़ा और अब उनकी ओर से कुछ शेयरों की बिक्री की जाएगी। ऑस्टिन ने यह भी वादा किया है कि 90 दिनों की अवधि के भीतर वे खुद को Raytheon से पूरी तरह से अलग कर लेंगे। हालांकि दाम बहुत ऊंचे हैं। बस हथियार बेचने वाली कंपनी को छोड़ कर ऑस्टिन को 1.7 मिलियन डॉलर एकत्र करने जा रहे हैं। हालांकि, ऑस्टिन ने अभी एक वर्ष के लिए Raytheon से जुड़े कुछ फैसलों से खुद को अलग कर लिया है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या यह पर्याप्त होगा?

भले ही प्रमुख हथियार बेचने वाली कंपनी का पश्चिमी एशिया के  एक आकर्षक ग्राहक को हथियार न बेच पाई, लेकिन हम जानते हैं कि अमेरिकी military-industrial complex ने अभी अपना प्रभाव जमाना शुरू किया है।

सऊदी अरब से बमों के सौदे को रद्द करना ध्यान हटाने की बस एक योजना हो सकती है। यह सभी को पता है कि आने वाले समय में, बाइडन प्रशासन पूरे अफगानिस्तान और पश्चिमी एशिया के अंतहीन संघर्षों को उकसा कर, उसमें शामिल होने जा रहा है। हर युद्ध हथियारों को बिक्री के नए कांट्रेक्ट के संदर्भ में Raytheon को फायदा पहुंचाएगा। और ऑस्टिन जो कि Raytheon के एक पूर्व निदेशक है, वे ही उन संघर्ष के क्षेत्रों में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति का फैसला करने जा रहे हैं। ऐसे में यह स्पष्ट है कि आगे क्या होने वाला है।

साथ ही, एक वर्ष अपेक्षाकृत कम समय है। यदि अमेरिकी रक्षा मंत्री के कार्यालय में वे एक साल से अधिक रुके तो वास्तव में Raytheon से जुड़े मामलों उनकी ही चलने लगेगी जो हितों के टकराव को और भी स्पष्ट करेगा।

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