औरंगजेब की भांति अब कुतुब मीनार पर भी NCERT बगलें झांक रही, समय आ गया है झूठे इतिहासकारों को सजा दिलवाने का

 


कुछ दिन पहले ही NCERT इस बात का कोई पुख्ता सबूत नहीं दे पाया था कि मुगलों ने पूजा स्थलों के लिए किसी भी तरह का अनुदान दिया था, या नहीं। इसी तरह युद्ध के दौरान मंदिरों के टूटने पर उन्हें कोई अनुदान मिला था। NCERT की किताबों में शाहजहां और औरंगजेब को काफी गौरवशाली बताया गया है जो कि बेहूदा बात है। लेखक नीरज अत्री ने अपनी किताब के जरिए कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं। इस किताब में बताया गया है कि NCERT के पास इस बात का कोई स्रोत नहीं था कि उनकी किताबों में लिखे तथ्यों का कोई स्रोत है या नहीं।। वहीं अब एक अन्य आरटीआई में ये भी कहा गया है कि ये कुतुबमीनार कुतुबुद्दीन ने ही बनवाया था, इसका एनसीईआरटी के पास कोई सबूत नहीं है।

Brainwashed Republic नीरज अत्री की ही एक किताब है जिसमें बताया गया है कि कैसे देश के युवाओं का ब्रेनवॉश किया जा रहा है।  NCERT की किताबों के जरिए ही वामपंथी देश के छात्रों के बीच अपना एजेंडा चला रहे हैं, जितने भी सामाजिक विज्ञान की पुस्तकें हैं वो ऐसा ही वामपंथी एजेंडा प्रमोट करती रहीं हैं। खास बात ये है कि NCERT की ये लगभग सभी किताबें जेएनयू के वामपंथियों द्वारा ही लिखी गई हैं।

इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र की सभी किताबों में वामपंथ का एजेंडा ही दिखता है जिन्हें इरफान हबीब, रोमिला थापर, सतीश चंद्र, विपिन चंद्रा, मृदुला मुखर्जी जैसे वामपंथी लेखकों और स्वघोषित शिक्षकों ने लिखा है। कक्षा 9 की एक पुस्तक जिसका शीर्षक ‘किंग्स एण्ज क्रोनिकल्स’ है। उसमें एक ऐसा पैराग्राफ जो औरंगजेब और शाहजहां जैसे क्रूर मुगल शासकों की गौरव गाथा गाता दिखता है। एनसीईआरटी के अनुसार जेएनयू के एतिहासिक अध्यन के विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर नजफ हैदर द्वारा लिखी गई हैं। साफ है कि उन्होंने किसी पूर्वानुमान के तहत ही ये सब लिखा है।

सामाजिक विज्ञान की पाठ्य पुस्तक के लिए बनाई गई सदस्यों की कमेटी पर नजर डालेगें तो पता लगेगा कि आधे से ज्यादा कमेटी के लोग जेएनयू के ही हैं। इनके अध्यक्ष सलाहकार और मुख्य सलाहकार वामपंथ की धरती जेएनयू से ही हैं। जिसका उदाहरण नजफ हैदर ही हैं जो जेएनयू के हैं औऱ अपनी किताबों में मुगल शासकों की तारीफों के पुल बांध रहे हैं।

वहीं जब भी इन किताबों  में लिखे तथ्यों के स्रोत पर बात होती है तो NCERT के पास से कुछ भी नहीं निकलता है, निकलेगा भी कैसे, क्योंकि इन किताबों में तो कल्पनाओं के आधार  वामपंथ के एजेंडे के तहत सबकुछ जेएनयू के तथाकथित इतिहाकारों ने लिखा है। सरकारों को इन सभी लेखकों के खिलाफ कार्रवाई करने चाहिए जो कि छात्रों और युवाओं को भ्रमित कर रहे हैं।

अपनी 2020 की नई शिक्षा नीति के तहत सरकार अपने पाठ्यक्रम का फिर से मूल्यांकन कर रही हैं जिसमें मार्क्सवाद, समाजवाद, नेहरूवाद, ब्रिटिश साम्राज्यवादियों और वामपंथ को लेकर मिली भ्रमित करने वाली विकृतियों को अलग किया जा रहा है जो कि एख सकारात्मक कदम है लेकिन सरकार को इन वैचारिक आतंकवाद को फैलाने वाले लेखकों पर भी सख्त कार्रवाई करनी चाहिए क्योंकि इन्होंने एक पीढ़ी तक को वामपंथ के ढकोसलों से ओत-प्रोत कर दिया है।

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