“जासूसी करोगे तो No बिजनेस”, अफ़गान सरकार ने चीनी कंपनियों से लाखों डॉलर के Contracts छीने

 


 Foreign Policy के एक लेख के मुताबिक, अफ़गानिस्तान ने अपने यहाँ चीन के जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश होने के बाद चीनी सरकार के साथ तेल और गैस खनन से संबन्धित सभी करारनामों को रद्द कर दिया है। चीन ने आज से करीब 1 दशक पहले अफ़गान सरकार के साथ देश में Mining सेक्टर में बड़े पैमाने पर निवेश करने की बात कही थी और संसाधनों को एक्सपोर्ट कर अफ़गान अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देने का वादा किया था, लेकिन चीनी सरकार अब अपने वादों से भागती दिखाई दे रही है, जिसके कारण अफ़गान सरकार को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। यही कारण है कि अब अफ़गान सरकार ने चीनी सरकार से कई मिलियन डॉलर के इन समझौतों को छीन लिया है और अब इनको लेकर नई शर्तों के साथ नए टेंडर जारी किए जाएंगे!

बता दें कि बीते वर्ष दिसंबर में अफगानिस्तान में एक बड़े चीन के जासूसी नेटवर्क का खुलासा हुआ था। Hindustan Times की एक रिपोर्ट के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान की खुफिया एजेंसी National Directorate of Security यानि NDS ने 10 दिसंबर को चलाये एक ऑपरेशन में 10 चीनी नागरिकों के एक जासूसी-नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था। इन सभी 10 चीनी नागरिकों को चीनी आतंरिक सुरक्षा मामलों से संबन्धित मंत्रालय से जुड़ा बताया गया था। इस खुलासे के बाद से ही अफ़गान सरकार का चीन पर से विश्वास उठ गया है। Hindustan Times में यह भी रिपोर्ट किया गया था कि अफ़ग़ानिस्तान के उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह चीनी दूतावास से माफी मांगने के लिए भी कह सकते हैं, और बदले में सभी चीनी नागरिकों को माफी देने की पेशकश कर सकते हैं। Foreign Policy को दिये बयान में एक अफगानी अधिकारी के मुताबिक “क्या कोई दोस्त ऐसे बर्ताव करता है?” अब अफ़गान सरकार के नए फैसले के बाद चीनी सरकार और अफ़गान सरकार के बीच तनाव और स्पष्ट हो गया है।

बता दें कि Mining सेक्टर अफ़गान अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण सेक्टर है। अमेरिका के भूगर्भ वैज्ञानिकों ने साल 2010 में करीब 3 ट्रिलियन डॉलर मूल्य के खनिज के भंडारों का पता लगाया था। भूगर्भ वैज्ञानिकों के अनुसार अफगानिस्तान में लोहे, तांबे, कोबाल्ट, सोने और लीथियम के बड़े भंडार मौजूद हैं। तब अमेरिकी सैन्य मुख्यालय पेंटागन के एक पत्र में कहा गया था कि, खनिजों भंडारों का उपयोग कर Afghanistan लीथियम उत्पादन के मामले में “सऊदी अरब” बन सकता है। अफ़गानिस्तान चाहता है कि वह अपने इन संसाधनों को एक्सपोर्ट कर जल्द से जल्द आर्थिक लाभ कमाए, ताकि उसकी अर्थव्यवस्था की विदेशी आर्थिक सहायता पर से निर्भरता कम हो सके! अभी अफ़ग़ानिस्तान की GDP का कुल 40 प्रतिशत हिस्सा उसे विदेशी आर्थिक सहायता के तौर पर मिलता है, जो लगातार कम होता जा रहा है। उधर चीन अफ़गान सरकार से सभी करार कर Mining सेक्टर में कोई प्रभावशाली कदम नहीं उठा रहा है, जिसके कारण अफ़गान सरकार को भी मुनाफा नहीं हो पा रहा है।

एक अफ़गान अधिकारी के मुताबिक “हमने उनको (चीन को) नोटिस जारी कर दिया है। या तो आप खनिज पदार्थों के खनन के कार्य को आगे बढ़ाएँ, या फिर हम किसी और को टेंडर जारी कर देंगे। यह सेक्टर अफ़गान की अर्थव्यवस्था के लिए अति-महत्वपूर्ण है और इस सेक्टर का विकास होना आवश्यक है। हम चाहते हैं कि सभी राष्ट्रीय स्तर के प्रोजेक्ट्स पर बात आगे बढ़े। हमने कई कई सालों से चीन को यहाँ काम सौंपा हुआ है, अब हमें भी बदले में आर्थिक फायदा होना चाहिए।” वर्ष 2007 में चीन की सरकारी MCC कंपनी ने Mes Aynak में कॉपर रिसर्व के एक साइट को 30 सालों के लिए लीज पर ले लिया था, और इसको लेकर दोनों पक्षों में करीब 2.83 बिलियन डॉलर की एक डील हुई थी।

हालांकि, उसके बाद चीनी कंपनी ने इस साइट को विकसित करने के लिए कोई कदम ही नहीं उठाया। ऐसे में अफ़गान सरकार को अपने यहाँ बड़े कॉपर रिजर्व होने के बावजूद उससे कोई खास आर्थिक लाभ नहीं हो पाया है। अफ़गान सरकार अब चीनी कंपनियों के इस रवैये से परेशान हो चुकी है। यही कारण है कि अब उसने Oil एवं Gas क्षेत्र के सभी करारनामों को रद्द कर चीनी सरकार को एक कड़ा संदेश भेजा है।

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