Parler बहुत ही जल्द Twitter को पटकने वाला था, अब लिबरल इसके CEO के खुन के प्यासे हो गये हैं

  


दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र में Parler App के CEO John Matze को अपनी जान बचाने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। खबरों के मुताबिक अब उन्हें जान से मारने की धमकी मिल रही है, जिसके बाद वे अपने परिवार के साथ “underground” हो गए हैं। Parler एप ट्विटर और फेसबुक जैसी वामपंथी सोशल मीडिया दिग्गजों के मुक़ाबले दक्षिणपंथी यूजर्स के बीच बेहद लोकप्रिय होती जा रही थी और नवंबर आते-आते इस एप को हर दिन करीब साढ़े तीन लाख बार download किया जाने लगा था। हालांकि, हाल ही में capitol hill में हुई हिंसा के लिए Silicon Valley ने Parler App को जिम्मेदार बताते हुए इस App को ही ब्लॉक कर दिया।

गूगल और Apple ने Parler को अपने App Store से हटा दिया, तो वहीं Amazon ने इस एप से अपनी सर्वर सेवा को ही वापस ले लिया, जिसके बाद यह App offline जा चुकी है और जिसके लिए Parler ने Amazon के खिलाफ मुकदमा भी दायर किया है। Parler App ट्विटर की सेंसर-नीति और दक्षिण-पंथ के खिलाफ पक्षपात के कारण दुनियाभर के ट्रम्प के समर्थकों के बीच बेहद लोकप्रिय होती जा रही थी, जिसके कारण ट्विटर और फेसबुक जैसी कंपनियों को टेक बाज़ार पर अपने एकाधिकार को लेकर चिंता होना लगी थी।

अमेरिका में Parler App के साथ किए जा रहे सलूक को आप इसी बात से समझ सकते हैं कि अब Parler के कर्मचारियों को भी एक खास वर्ग द्वारा लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। Big Tech ने Parler को बर्बाद कर अपने एकाधिकार को बनाए रखने की भरपूर कोशिश की है, और अब इसी कोशिश के तहत इसी वर्ग के लोग Parler के CEO को जान से मारने की धमकी देने पर उतर आए हैं।

नवंबर महीने के अंत तक Parler एप के रोजाना एक्टिव यूजर्स की संख्या करीब 30 लाख तक पहुँच चुकी थी। ऐसे में Big Tech को लगा कि अगर इस App को बड़ा होने से नहीं रोका गया, तो यह उनका प्रभाव खत्म करने में देर नहीं लगाएगी। Big Tech के इस तानाशाही रवैये के कारण पहले ही भारत, ऑस्ट्रेलिया और तुर्की जैसे देश कई बड़े कदम उठाने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। Uganda भी हाल ही में चुनावों से पहले इन सभी अमेरिकी दिग्गज कंपनियों को बैन करने का कदम उठा चुका है। अब जिस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी Big Tech के खिलाफ अभियान देखने को मिल रहा है, सिर्फ यही एक तरीका है कि इस वामपंथी गठबंधन को लोकतन्त्र का पाठ पढ़ाया जा सकता है।

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