ट्रंप के जाने के बाद, चीन के लिए सबसे बड़ा खतरा बने PM मोदी!

 


यदि आपको लगता है कि जो बाइडन के वर्तमान रुख के बाद चीन को वैश्विक पटल पर वर्चस्व जमाने से कोई नहीं रोक पाएगा, तो जरा ठहरिए। अमेरिका के पीछे हटने के बाद अब भारत ने चीन के विरुद्ध मोर्चा संभाल लिया है। जून 2020 में जिन 59 एप्स को भारत ने आंशिक तौर पर प्रतिबंधित किया था, अब उसे भारत ने स्थाई कर दिया है, यानि टिकटॉक सहित 59 एप्स पर लगा प्रतिबंध अब कभी नहीं हटाया जाएगा।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, “हाल ही में नए नोटिस जारी करते हुए मिनिस्ट्री ऑफ एलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉर्मेशन टेक्नॉलोजी ने जून 2020 में टिक टॉक सहित 59 चीनी एप्स पर लगे प्रतिबंध को स्थाई करने का निर्णय लिया है। सरकार ने इन एप्स को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया था, परंतु परिणाम असंतोषजनक था”

बता दें कि जून में चीन की बढ़ती दखलंदाज़ी के बीच गलवान घाटी में चीन ने भारत पर 15 जून 2020 को घात लगाकर हमला किया था। इस हमले का जहां सैनिकों ने मुंहतोड़ जवाब दिया, वहीं केंद्र सरकार ने आर्थिक मोर्चे पर भी चीन को झटका देने के लिए 59 चीनी एप्स पर 29 जून को प्रतिबंध लगाया, जिसमें टिक टॉक, शेयर इट, UC ब्राउजर जैसे एप्स शामिल थे। तद्पश्चात WeChat, AliExpress aur PUBG के एन्ड्रोइड वर्जन सहित 250 से अधिक चीनी एप्स पर ताबड़तोड़ प्रतिबंध लगाए।

इसके पीछे सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन एप्स से देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय अखंडता को खतरा था, जिसके चलते ये निर्णय लेना पड़ा था। सरकार ने इन सभी कंपनियों और उनके लीगल प्रतिनिधियों को अवसर दिया कि वे इस प्रतिबंध के विरुद्ध अपने तर्क प्रस्तुत करे, और सरकार के गाइडलाइंस के निर्देशानुसार चले। परंतु उन्हे संतोषजनक उत्तर नहीं मिल, जिसकी वजह से 59 एप्स पर लगा प्रतिबंध अब पूर्ण रूप से स्थाई हो चुका है।

लेकिन इससे चीन को किस प्रकार से चुनौती मिलेगी? दरअसल अमेरिका में बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद से चीन के विरुद्ध चल रहा अभियान काफी ठंडा पड़ चुका है। स्थिति तो यह हो चुकी है कि अब बाइडन सरकार कोरोना वायरस को चीन से जोड़ने से भी कतरा रही है।

ऐसे में संदेश तो यही जाएगा कि चीन के तानाशाही रवैये को चुनौती देने वाला कोई नहीं है। लेकिन भारत ने पहले 20 जनवरी को नाकूला में चीनी PLA के हमले को नाकाम करके और फिर चीनी एप्स को स्थाई रूप से प्रतिबंधित करके स्पष्ट संदेश भेजा है – ये खेल अभी खत्म नहीं हुआ है।

इसके अलावा भारत की वैक्सीन कूटनीति ने भी चीन की नाक में दम कर रखा है। दुनिया के बड़े बड़े देश तो भारत के वैक्सीन की सेवाएँ लेना चाहते हैं, तो वहीं दूसरी ओर चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स नीति भी नाकाम सिद्ध हो रही है, क्योंकि पाकिस्तान को छोड़कर भारत के लगभग सभी पड़ोसी भारत के वैक्सीन से काफी प्रसन्न है।

ऐसे में अब चीन के समक्ष भारत एक मजबूत प्रतिद्वंदी के रूप में सामने आ रहा है, और चीन के लिए अब अपनी मनमानी करना उतना ही कठिन होगा, जितना ट्रम्प के नेतृत्व में अमेरिका के समक्ष उसे होता था।

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