राकेश टिकैत राजनीति में आना चाहते थे, अब UAPA लगते ही उनके अरमानों पर पानी फिर गया है

  


किसान नेता राकेश टिकैत आज की स्थिति में किसान आंदोलन का मुख्य चेहरा बन गए है। गाजीपुर बॉर्डर पर बेठे किसानों के बीच बैठ राकेश टिकैत ने इस किसान आंदोलन में अपने लिए राजनीतिक संभावनाएं तलाश ली थीं, लेकिन दिल्ली में हुई 26 जनवरी की हिंसा के बाद उनके सारे अरमानों पर पानी फिर गया है। उन्होंने पहले कई बार राजनीति में हाथ पांव मारने की कोशिशें तो की थीं लेकिन सफल नहीं हुए। ऐसे में इस बार जब संभावनाएं थीं तो हिंसा के बाद उन पर ही यूएपीए जैसी संगीन धाराएं लगा दी गई हैं और इसके साथ ही टिकैत की नई राजनीतिक पारी शुरु होने से पहले ही खत्म हो गई है।

भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत कहने को तो किसान नेता हैं लेकिन वो असल में हमेशा से ही राजनीतिक मंशाए रखे हुए हैं। कांग्रेस के साथ उनके रिश्ते किसी से भी छिपे नहीं है।

भारतीय किसान यूनियन हमेशा ही चुनाव में किसानों से कांग्रेस के पक्ष में वोट डालने का फतवा निकालता रहा है। टिकैत साल 2014 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अमरोहा सीट से चुनाव भी लड़ चुके हैं। हालांकि, उनकी करारी हार हुई थी और वो केवल 9 हजार के करीब वोट ही हासिल कर पाए थे।

ऐसे में केन्द्र सरकार द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों के खिलाफ जब किसानों ने पंजाब में विरोध करना शुरु किया तो किसानों के नाम पर राकेश टिकैत ने भी इस आंदोलन के जरिए अपनी राजनीतिक पारी शुरु करने की कोशिश की। राकेश टिकैत हर मौके पर ये कहते रहे कि वो राजनीति करने नहीं आए हैं लेकिन असल बात ये है कि वो केवल और केवल राजनीति ही कर रहे हैं। किसानों की ट्रैक्टर रैली में उन्होंने ही सबसे ज्यादा लोगों को भड़काया था।

दिल्ली में तथाकथित किसानों ने जो अराजकता फैलाई और लाल किले पर धार्मिक झंडा फहराया उसके पीछे भी अब बड़ी वजह किसानों को उनका दिया संबोधन बताया जा रहा है। टिकैत के खिलाफ जहां दिल्ली पुलिस ने लुक आउट नोटिस जारी किया है तो वहीं उन पर अब यूएपीए की धारा भी लगा दी गई हैं।

राकेश टिकैत पर वो धाराएं लगाई गई हैं जो किसी संगीन आतंकवादी पर लगाई जाती हैं। टिकैत अब चौतरफा घिरे हुए हैं। ऐसे में ये माना जा रहा है कि उन्होंने इस किसान आंदोलन  के जरिए राजनीतिक एंट्री मारने का जो प्लान बनाया था, वो अब पूरी तरह से फेल हो गया है, और इस प्लानिंग के फेल होने के जिम्मेदार भी किसान ही हैं, क्योंकि उन्होंने टिकैत के कहने पर ही दिल्ली में गणतंत्र दिवस के दिन आतंक मचा दिया था।

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