यूपी बजट 2021ः बीत गए चार साल, सिर्फ कागजों में दौड़ती रही गोरखपुर मेट्रो


गोरखपुरः प्रदेश की योगी सरकार आगामी 22 फरवरी को अपन इस कार्यकाल का पांचवां और अंतिम बजट पेश करने जा रही है. माना जा रहा है कि इस बार का बजट चुनावी होने के साथ-साथ भारी-भरकम भी हो सकता है. 2017 में सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्वांचल के विकास पर जोर देना शुरू किया. शुरुआत में सीएम का ज्यादातर फोकस गोरखपुर और उसके आसपास जिलों पर रहा. बीते बजट में राज्य सरकार के गोरखपुर में मेट्रो परियोजना के लिए 200 करोड़ का बजट भी रखा. अब जब सरकार अपने कार्यकाल का अंतिम बजट पेश करने जा रही है, ऐसे में गोरखपुर मेट्रो जनता की उम्मीदों पर कितनी आगे बढ़ी इसको जानने के लिए ईटीवी भारत गोरखपुर वासियों के बीच पहुंचा.

बता दें कि बीते साल अक्तूबर महीने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में गोरखपुर में लाइट रेल ट्रांजिट (एलआरटी) परियोजना को हरी झंडी दी गई थी. कैबिनेट ने गोरखपुर महानगर में यातायात व्यवस्था को सुगम एवं सुचारू बनाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम के रूप में लाइट रेल ट्रांजिट (एलआरटी) परियोजना क्रियान्वयन तथा डीपीआर को अनुमोदन दिया था. इसके पहले सरकार के इसके लिए बजट 200 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया था. जिसके बाद से लोगों को मेट्रो के काम में तेजी आने की उम्मीद थी. फिलहाल जून 2017 में सर्वे से शुरू हुआ गोरखपुर मेट्रो की तैयारियों का सफर करीब चार साल बाद अब डीपीआर तैयार होने तक पहुंच चुका है.

सीएम योगी ने डीपीआर में किया बदलाव

साल 2019 के अंत में इस डीपीआर में बदलाव किया गया. इस बदलाव के बाद तीन जनवरी 2020 को लखनऊ में हुई एक बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने गोरखपुर में चलने वाले मेट्रो परियोजना संबंधी कार्यों का प्रस्तुतीकरण किया गया. मुख्यमंत्री ने ही तीन बोगियों वाली मेट्रो का प्रस्ताव तैयार करने के साथ ही रेलवे स्टेशन के पास ही मेट्रो स्टेशन तैयार करने का निर्देश दिया था. इसके बाद डीपीआर में एक और बड़ा बदलाव कर दो बोगियों की जगह तीन बोगियों वाली गोरखपुर मेट्रो का प्रस्ताव तैयार किया.

गोरखपुर में इस परियोजना के लिए मेट्रो मैन ई. श्रीधरन का दौरा भी हो चुका है. गोरखपुर विकास प्राधिकरण के कार्यालय में इसके लिए एक कमरा भी आवंटित हुआ है जहां पर मेट्रो से संबंधित कार्य हो सके, लेकिन घोषणा के चार साल में भी जमीन पर कोई काम नहीं होने से इसको लेकर लोगों के मन मे संसय है. यही वजह है कि बजट में इसपर लोगों का ध्यान है.

अभी तक मेट्रो का एक पिलर भी नहीं खड़ा हो सका

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने पहले कैबिनेट में गोरखपुर को मेट्रो रेल परियोजना की सौगात दिया था. लेकिन सरकार के 4 साल पूरे होने के बाद भी यह परियोजना सिर्फ कागजों पर ही दौड़ रही है. इस सरकार का यह आखरी बजट भी है, अगर इसमें भी मेट्रो के लिए पूरे धन का आवंटन नहीं होता है और सरकार इसके निर्माण की तिथि का उल्लेख नहीं करती है तो यह गोरखपुर वासियों के साथ धोखा तो होगा ही योगी सरकार की बहुत बड़ी नाकामी भी होगी. लोगों ने उम्मीद जताई है कि योगी को अपने इस बजट में अपने शहर गोरखपुर को यह तोहफा हर हाल में देना ही चाहिए.

लोगों ने दी मिलीजुली प्रतिक्रिया

मेट्रो परियोजना के अभी तक शुरू नहीं होने पर लोगों ने मिली- जुली प्रतिक्रिया दी है. आम लोगों ने तो इस पर राजनीतिक से हटकर अपनी बात कही तो भाजपा के लोग बोलने को ही तैयार नहीं हुए. वहीं समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपसभापति नगर निगम जियाउल इस्लाम ने कहा कि मेट्रो परियोजना योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता में शामिल थी. आखिर क्या वजह है कि उनकी सक्रियता और चाहत के बाद भी मेट्रो का एक खम्भा भी 4 साल में नहीं खड़ा हो सका. जबकि प्रदेश की समाजवादी सरकार ने अखिलेश यादव के नेतृत्व में केंद्र सरकार से बिना मदद लिए लखनऊ में मेट्रो रेल परियोजना पूर्ण करके दिखाया. कानपुर में भी शुरुआत हुई. यह सरकार भी जहां कुछ कर रही है उसके पीछे भी अखिलेश सरकार की ही परियोजना काम कर रही है.

शहर वासियों ने कहा कि योगी के प्रयास में कोई कमी नजर नहीं आ रही. लगता है केंद्रीय सरकार राह में रोड़े अटका रही है. तो वही एक बुजुर्ग ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह परियोजना यहां पूरी होगी. वरिष्ठ अधिवक्ता अजय पाठक ने कहा कि सीएम योगी को अपने बजट में मेट्रो परियोजना के लिए स्पष्ट रूप पेश करना होगा तभी जनता में विश्वास जागेगा. नहीं तो इसे बनाने के लिए योगी को प्रदेश में दोबारा सरकार बनाना होगा.

सिर्फ कागजों में दौड़ती रही गोरखपुर मेट्रो
सिर्फ कागजों में दौड़ती रही गोरखपुर मेट्रो

गोरखपुर मेट्रो की परियोजना में होंगे दो कॉरिडोर

गोरखपुर में मेट्रो परियोजना के लिए प्रदेश कैबिनेट से पास हुए डीपीआर के अनुसार इस पर 4672 करोड़ रुपये खर्च होने हैं. इसको पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम के तहत (ट्रांजिट) के रूप में मंजूरी दी गई है. गोरखपुर मेट्रो की परियोजना में दो कॉरिडोर बनाए जाने हैं. जिसमें पहला कॉरिडोर श्याम नगर बरगदवा से शुरू होकर मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय तक जाएगा. जिसकी लंबाई 15.14 किलोमीटर होगी और इसने कुल 14 स्टेशन प्रस्तावित हैं. इसी प्रकार दूसरे कॉरिडोर मेडिकल कॉलेज के गुलरिहा चौराहे से नौसढ़ चौराहे तक 12.70 किलोमीटर लंबा होगा. इस पर 13 स्टेशन बनाए जाएंगे. तीन बोगियों वाली मेट्रो के साथ एक साथ 600 लोग सफर कर सकेंगे ऐसा डीपीआर तैयार किया गया है. मेट्रो का रूट पूरी तरह से एलिवेटेड यानी कि पिलर पर होगा.

पहला कॉरीडोर

15.14 किमी लंबा पहला कॉरीडोर श्याम नगर, बरगदवां, शास्त्री नगर, नथमलपुर, गोरखनाथ मंदिर, हजारीपुर, धर्मशाला, गोरखपुर रेलवे स्टेशन, गोरखपुर यूनिवर्सिटी, मोहद्दीपुर, रामगढ़ताल, एम्स, मालवीय नगर से एमएमएमयूटी तक का होगा. यानी इसपर 14 स्टेशन होंगे। एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2024 में 1.55 लाख लोगों के इसमें रोजाना सफर करने की उम्मीद है. यात्रियों की यह संख्या 2031 में बढ़कर 2.05 लाख होगी जबकि अगले दस साल यानी वर्ष 2041 तक इसमें 2.73 लाख लोग रोजाना सफर कर सकेंगे.

सिर्फ कागजों में दौड़ती रही गोरखपुर मेट्रो
गोरखपुर मेट्रो कॉरिडोर

दूसरा कॉरिडोर

दूसरा कॉरीडोर गुलरिहा, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, मुगलहां, खजांची बाजार, बशारतपुर, अशोक नगर, विष्णु नगर, असुरन चौक, धर्मशाला, गोलघर, कचहरी चौराहा होते हुए नौसड़ तक का होगा. इसकी लंबाई 12.70 किमी लंबे इस रूट पर 12 स्टेशन प्रस्तावित है. इस रूट पर 2024 में 1.24 लाख यात्रियों के रोजाना सफर करने की उम्मीद है. 2031 तक यह संख्या बढ़कर 1.73 लाख और अगले दस साल में 2.19 लाख लोगों के रोजाना सफर करने के आसार हैं.

केंद्रीय बजट के बाद बढ़ी उम्मीद

केंद्र सरकार द्वारा बजट में लाइट मेट्रो के लिए प्रावधान किए जाने से यूपी के तीन शहरों गोरखपुर, प्रयागराज और वाराणसी में लाइट मेट्रो चलने की राह आसान हो गई है. राज्य सरकार प्रदेश के सात शहरों लखनऊ, आगरा, कानपुर, मेरठ, गोरखपुर, वाराणसी और प्रयागराज में मेट्रो रेल चलाने के लिए प्रस्ताव तैयार किया था. लखनऊ में मौजूदा समय मेट्रो रेल चल रही है. कानपुर और आगरा में मेट्रो रेल परियोजना का काम शुरू हो गया है. मेरठ में रैपिड रेल परियोजना शुरू हो चुकी है. वहीं गोरखपुर, वाराणसी और प्रयागराज में आबादी कम होने के चलते मेट्रो रेल परियोजना शुरू होने में बाधा आ रही है. केंद्रीय बजट में लाइट मेट्रो के लिए प्रावधान किए जाने के बाद यूपी के तीन शहरों में इसकी राह आसान होगी.

क्या होता है लाइट मेट्रो

मेट्रो रेल परियोजना से लाइट मेट्रो की निर्माण लागत कम आती है. मेट्रो रेल निर्माण पर 200 से 215 करोड़ रुपये प्रति किमी लागत आती है, जबकि लाइट मेट्रो के निर्माण की लागत 120 से 125 करोड़ रुपये आती है. इसके लिए पटरियां भी कम चौड़ी होती हैं और डिब्बे भी कम होते हैं. प्लेटफार्म भी इसके छोटे होते हैं. लाइट मेट्रो खासकर छोटे शहरों के लिए होता है. इसलिए इस योजना के आने के बाद यूपी के छोटे शहरों में बेहतर यातायात की सुविधा देने के लिए लाइट मेट्रो काफी कारगर साबित हो सकता है.

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