टूलकिट केस में हुआ बड़ा खुलासा, जूम मीटिंग में पहचान छुपाकर बैठे थे 70 लोग, 5 की हुई पहचान


नई दिल्ली।
 किसान आंदोलन के दौरान गणतंत्र दिवस पर ट्रेक्टर रैली को भड़काने के लिए किये गए टूलकिट केस (Toolkit Case) में की जांच दिल्ली पुलिस (Delhi Police) कर रही है। दिल्ली पुलिस ने बताया इसे बनाने के लिए जूम मीटिंग हुई थी। इस बैठक में लगभग 70 लोग शामिल थे। ज्यादातर लोगों ने अपनी पहचान छिपा रखी थी यानी कि बिना नाम बताए वे इस मीटिंग में बैठे थे। पुलिस के अनुसार इस केस में पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन के संस्थापक मो धालीवाल (MO Dhaliwal) और सह-संस्थापक अनीता लाल (Anita Lal) की पहचान हो चुकी है। वहीं निकिता जैकब (Nikita Jacob), शांतनु (Shantanu) और दिशा रवि (Disha Ravi) की पहचान हो चुकी थी। इस मीटिंग में शामिल हुए बाकी आरोपियों की पहचान का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस के अनुसार इसके लिए शांतनु और निकिता की गिरफ्तारी की आवश्यकता है।

पुलिस (Delhi Police) ने बताया किसान हिंसा में टूलकिट तैयार करने और शेयर करने वाले सभी लोगों के बारे में गूगल से पूरी डिटेल मांगी गई थी। मगर गूगल ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है। स्पेशल सेल की साइबर यूनिट को अब तक गूगल के जवाब का इंतजार है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने टूलकिट को मीटिंग के दौरान गूगल doc पर साझा किया गया था।

टूलकिट केस में आरोपी दिशा रवि की गिरफ्तारी पर विपक्षी नेताओं ने आलोचना की है। कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा कि इस केस को हवा देकर सरकार अपने कुकर्मों को छापने का प्रयास कर रही है। मैं समझता हूं कि विवेकशील लोग इसका समर्थन न करके विरोध ही करेंगे। कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि हम किसान आंदोलन के साथ हैं और उनके पीछे खड़े रहेंगे।

वहीं कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि इस सरकार में जज और न्यायपालिका सभी समझौता कर चुके हैं। यही कारण है कि बिना किसी विवाद के दिशा रवि को जेल भेज दिया गया है। उन्होंने आगे कहा, ‘दिशा रवि के मामले में कोई दम नहीं है कि उसे जेल भेजा जाए। यदि हम मान भी लें, कि उस बैठक में खालिस्तानी था, तो क्या हो गया। लिंक से कोई भी जुड़ सकता है, बातों से क्या कुछ भी कर सकता है।’

उदित राज ने आगे कहा, ‘जांच करना अलग बात है मगर प्राकृतिक न्याय होना चाहिए। कोरेगांव मामले में फर्जी आरोपों में लोग जेलों में पड़े हैं। अगर कोई देश तोड़ने का काम कर रहा है वो बीजेपी का IT सेल कर रहा है। प्रधानमंत्री के ट्वीट 60-65 प्रतिशत फर्जी हैं। आप अमित मालवीय को ही देखिए। वह कितने फर्जी ट्वीट करता है।’

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