कृषि मंत्री के 'खून से खेती' वाले बयान पर 'दिग्गी' पलटवार, कहा-गोधरा में जो हुआ वो क्या था?

 


नई दिल्ली/ भोपाल। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्यसभा में कृषि कानूनों को लेकर सरकार का बचाव किया. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की बात सुनने को तैयार है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि इन कानूनों में कोई खराबी है. ना तो विपक्ष और ना ही किसान नेता अब तक कानून में कोई कमी गिना सके हैं. सब जानते हैं कि खेती के लिए पानी की जरूत होती है. लेकिन सिर्फ कांग्रेस ही है जो खून से खेती करना जानती है. बीजेपी ऐसा कभी नहीं कर सकती. कृषि मंत्री के इस बयान पर राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने पलटवार किया.

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'दिग्गी' का पलटवार

दिग्विजय सिंह ने बीजेपी पर सांप्रदायिक दंगे भड़काने का आरोप लगाया.'दिग्गी' ने कहा कि 'गोधरा में जो हुआ वो खून की खेती थी या पानी की खेती थी. बीजेपी नफरत की राजनीति करती आई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के साथ बात करने के लिए दो मंत्री लगाए. एक नरेंद्र सिंह तोमर दूसरे पीयूष गोयल. पहले के पास खेती ही नहीं तो वो किसानी क्या जानते होंगे. दूसरे कॉर्पोरेट सेक्टर के प्रवक्ता हैं.'

'किसानों को गलत जानकारी दी जा रही'

केंद्रीय कृषि मंत्री ने सदन में कहा कि किसानों को गलत जानकारी दी गई कि इन कानूनों से उनकी जमीन छिन जाएगी. इन कानूनों में कहीं ये नहीं लिखा है कि किसानों से उनकी जमीन छीनी जा सकती है.

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'टैक्स लगाने वाली सरकार के खिलाफ हो आंदोलन'

उन्होंने कहा कि 'पंजाब सरकार के कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग एक्ट में किसान को जेल जाने और जुर्माने के तौर पर 5 लाख रुपये देने तक का प्रावधान है.भारत सरकार ने जो एक्ट बनाया है उसमें किसान कभी भी कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से बाहर आ सकता है. APMC के अंदर राज्य सरकार का टैक्स है.APMC के बाहर केंद्र सरकार का एक्ट है, जो टैक्स को खत्म करता है. मैं किसानों से पूछता हूं जो सरकार टैक्स ले रही, लगा रही और बढ़ा रही है, आंदोलन उसके खिलाफ होना चाहिए या टैक्स फ्री करने वाले के खिलाफ?'

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