फिल्म से कम नहीं मुख्यमंत्री योगी की कहानी, जानकर रह जाएंगे हैरान


 साल 2017 से उत्तर प्रदेश में योगी सरकार कायम है. सूबे के विकास के लिए सीएम योगी लगातार काम कर रहे हैंं. जिसमें काफी हद तक वह सफल भी हो चुके हैं. सीएम ने सूबे को एक अलग पहचान दी है. जिसको देखते हुए आने वाले चुनावों को लेकर योगी सरकार के लिए जीत का रास्ता साफ नजर आ रहा है. अपने फैसलों के कारण सीएम योगी को बेस्ट सीएम की लिस्ट में भी पहला स्थान हासिल है.चाहे प्रदेश में माफिया राज खत्म करने की बात हो या कोरोना जैसी आपदा को अवसर में बदलने की हर तरफ सीएम योगी ने अपनी खास छाप छोड़ी है. तो वहीं आज हम आपको यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बारे में एक रोचक कहानी बताने जा रहे हैं. जिसे सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे. 12 साल की उम्र में ही योगी आदित्यनाथ नायक बन गए थे.

दरअसल, योगी आदित्यनाथ साल 1999 से ही आजमगढ़ आते जाते रहते थे. इस दौरान एक पुजारी की हत्या हो गई थी, जिसे लेकर योगी ने बड़ा प्रदर्शन किया था. इसके बाद साल 2005 में मऊ दंगे के बाद हिंदू युवा वाहिनी ने आजमगढ़, मऊ और अन्य आसपास के जिलों में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी थी. अहमदाबाद धमाकों के एक महीने बाद गुजरात पुलिस ने आजमगढ़ से हमले में शामिल एक आरोपी अबू बशीर को पकड़ा था और भगवा संगठनों ने हिंदू युवा वाहिनी के नेतृत्व में एलान किया कि वो आजमगढ़ में आतंकवाद के खिलाफ रैली निकालेंगे.

दिन तय हुआ, 7 सितंबर 2008, जगह- डीएवी कॉलेज का मैदान. योगी आदित्यनाथ उसमें मुख्य वक्ता थे. रैली की सुबह, गोरखनाथ मंदिर से करीब 40 वाहनों का काफिला निकला. उन्हें आजमगढ़ में विरोध की पहले से ही आशंका थी, इसलिए टीम योगी पहले से ही तैयार थी. काफिले में योगी की लाल एसयूवी सातवें नंबर पर थी. आजमगढ़ के करीब पहुंचने तक काफिले में करीब 100 चार पहिया और सैकड़ों की संख्या में बाइक जुड़ चुकी थीं. एक पत्थर काफिले में मौजूद सातवीं गाड़ी यानि योगी के गाड़ी पर लगा.

योगी के काफिले पर सुनियोजित हमला हो चुका था. काफिला तीन हिस्सों में बंट चुका था. हमलावर अपने लक्ष्य को ढूंढ रहे थे. लेकिन योगी आखिर थे कहां? हर कोई यही सवाल कर रहा था. उनकी तलाश में लोग व्याकुल हो रहे थे, तभी पता चला कि योगी आगे गई छह कारों के साथ निकल चुके थे, वास्तव में वो काफिले के पहली एसयूवी में थे. रैली तीन घंटे तक चली. योगी ने आतंकी हमलों और बशीर की गिरफ्तारी को राजनीतिक रंग देने पर तीखा हमला बोला, लेकिन अपने ऊपर हुए जानलेवा हमले पर एक शब्द भी नहीं कहा. रैली के करीब 10 दिन बाद ही, दिल्ली पुलिस ने जामिया नगर स्थित के बाटला हाउस में इंडियन मुजाहिदीन की तलाश में छापे मारे, जिसमें दो संदिग्ध मारे गए। वहीं दो फरार होने में सफल रहे. जांच में पता चला कि ये सभी सदस्य आजमगढ़ के थे.

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