मोतिहारी : सरिसवा नदी के संरक्षण और उद्धार के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तैयार किया एक्शन प्लान


पूर्वी चंपारण (मोतिहारी): नेपाल से निकलकर भारत में बहने वाली सरिसवा नदी के संरक्षण और उद्धार के लिए बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक्शन प्लान तैयार कर लिया है. पीएमओ के निर्देश के आलोक में राज्य की पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग ने नेपाल स्थित उद्योगों द्वारा प्रदूषित की जा रही, सरिसवा नदी के मामले में विदेश मंत्रालय के माध्यम से अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. विभाग ने आवश्यक कदम उठाने के लिए जल शक्ति मंत्रालय, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और केंद्रीय जल आयोग को रिपोर्ट सौंपी है. जिसकी जानकारी बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव एस. चंद्रशेखर ने अपीलकर्ता डॉ. स्वयंभू शलभ को पत्र के माध्यम से दी है.

प्रदूषित नदियों की प्राथमिकता सूची में शामिल
बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण के सदस्य सचिव एस. चंद्रशेखर के पत्र के साथ 8 पृष्ठ की सरिसवा नदी की परीक्षण रिपोर्ट भी संलग्न की गई है. सदस्य सचिव के पत्र में बताया गया है कि सरिसवा नदी को प्रदूषित नदियों की प्राथमिकता वाली कैटेगरी में चिह्नित किया गया है और बिहार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सरिसवा नदी के प्रदूषण से अवगत है. रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की बैठक में सरिसवा नदी के मामले को वर्ष 2019 में उठाया जा चुका है. इसके अलावा 2020 को जल शक्ति मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय निगरानी समिति की बैठक में भी पर्यावरण, वन, जलवायु परिवर्तन विभाग और बिहार के मुख्य सचिव द्वारा इस मामले को उठाया गया था. जिस बैठक में जल शक्ति मंत्रालय, पर्यावरण, वन मंत्रालय और जल आयोग से विदेश मंत्रालय के जरिये नेपाल से जुड़ी इस नदी के प्रदूषण की समस्या का समाधान किये जाने का अनुरोध किया गया था.

नेपाल से निकलती है सरिसवा नदी
बता दें कि नेपाल से निकलने वाली सरिसवा नदी रक्सौल में भारतीय परिक्षेत्र में प्रवेश करती है. नेपाल के बीरगंज शहर के डोमेस्टिक वेस्टेज के अतिरिक्त इस क्षेत्र में स्थित विभिन्न उद्योगों द्वारा इंडस्ट्रियल वेस्टेज भी गिराए जाते हैं. जबकि बीरगंज नेपाल का एक घनी आबादी वाला शहर है. सरिसवा नदी की वाटर क्वालिटी रिपोर्ट यह संकेत देती है कि यह नदी बिहार में प्रवेश करने से पहले ही पूर्णतया प्रदूषित हो जाती है. उसके बाद भारतीय क्षेत्र में इस नदी पर प्रदूषण का कोई विशेष भार नहीं है. भारतीय क्षेत्र में यह नदी कहीं भी औद्योगिक प्रदूषण से प्रभावित नहीं होती. वहीं रक्सौल अनुमंडल के अंदर तीन प्रमुख नालों का डोमेस्टिक वेस्ट और सीवेज इस नदी में गिरता है.

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