चीन फिर रच रहा है साजिश, एलएसी पर तैनात कीं मिसाइल, रॉकेट और तोपें


पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन के बीच जारी गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है. इसके पीछे का अड़ियल रुख और दगाबाजी है. चीन का इतिहास है कि ये पीठ पर छुरा घोंपता है. ये ऐसा देश है जो समझौता करने बाद ही धोखा देता है. इसका मकसद दूसरे की जमीन पर, व्यापार पर, आजादी पर कब्जा करना रहता है.

पूर्वी लद्दाख इलाके में तैनात सेना को पीछे हटाने को लेकर भारत और चीन के बीच नौ दौर की सैन्‍य वार्ता हो चुकी है, लेकिन चीनी सेना 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव कम करने का कोई संकेत नहीं दे रही है.

अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक़, चीनी सेना ने सीमा पर तनाव को देखते हुए तिब्बत में आर्टिलरी गन, स्व-चालित होवित्जर और सरफेस-टू-एयर मिसाइल इकाइयों की तैनाती बढ़ा दी है. इंडियन नेशनल सिक्योरिटी प्लानर्स के मुताबिक, चीनी सेना तीनों सेक्टरों में नई तैनाती कर रहा है और सैनिकों के साथ ही भारी सैन्य उपकरणों को एक जगह से दूसरी जगह भेजा जा रहा है. इसके साथ ही चीन ने पैंगोंग त्सो के फिंगर क्षेत्रों में नया निर्माण कर भारत को उकसाने की हरकत कर रहा है.

इंडियन आर्मी को ऐसे सबूत मिले हैं जिससे पता चलता है कि साउथ ब्‍लॉक में चीन सैनिकों की नई तैनाती कर रही है, जिसमें 35 भारी आर्मी वाहन हैं, चार 155 एमएम के पीएलजेड, 83 स्व-चालित होवित्जर शामिल हैं. ये सभी बदलाव पीएलके कैंप में रखा गया है. ये कैंप नियंत्रण रेखा से मात्र 82 किलोमीटर की दूरी पर है जो कि चूमार पूर्वी लद्दाख में है.

दरअसल, एक महीने पहले भी इसी तरह से चीन सेना के कैंप में बदलाव किए गए थे और भारी संख्‍या में वाहन और हथियार लाए गए थे. ये बदलाव रूडोक निगरानी सुविधा के पास और एलएसी से 90 किमी दूर मौजूद था. इस दौरान सैनिकों के लिए यहां पर चार नए बड़े शेड और सैनिक क्वार्टर का निर्माण किया गया था.

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