प्रशांत किशोर सिर्फ आंकड़ों का खिलाड़ी नहीं है, वो TMC के कई सोशल मीडिया Accounts का अवैध यूजर भी है


चुनावी रणनीतिकार का काम होता है पार्टी को एक सूत्र में बांध कर रखते हुए पार्टी के लिए चुनाव की नीतियां बनाना, लेकिन TMC को जीत दिलाने की बात कहकर पश्चिम बंगाल गए प्रशांत किशोर TMC के लिए ही मुसीबत का सबब बन गए हैं। इनकी नीतियों के चलते अब पार्टी के वरिष्ठ नेता ममता को ठेंगा दिखाकर बीजेपी से हाथ मिला रहे हैं। पीके से नाराजगी की वजह केवल उनकी नीतियां ही नहीं बल्कि नेताओं के निजी मामलों में दखल देना भी है क्योंकि वो पार्टी के वरिष्ठतम नेताओं के ट्वीट और समस्त सोशल मीडिया अकाउंट्स के आईडी और पासवर्ड तक अपने पास रखते हे और समय-समय पर उन्हें मॉनिटर करते करते हैं।

ममता बनर्जी के लिए उनके तुरुप के इक्के ही जोकर बन गए हैं क्योंकि बंगाल की सियासत में जिस रणनीतिकार प्रशांत किशोर को चुंबक का काम कर पार्टी को संगठित रख चुनावी रणनीति तैयार करना था, उनके खुद के प्रयासों के कारण ममता के नेता उन्हें छोड़ चुके हैं। ऐसे में हाल के दिनों में पार्टी छोड़ चुके टीएमसी नेता दिनेश त्रिवेदी ने बताया था कि कैसे प्रशांत किशोर पार्टी नेताओं पर जरूरत से ज्यादा शक करते हैं और उनके सोशल मीडिया हैंडल तक चेक करते है और उनकी निजता का सरेआम नीतियों के नाम पर हनन करते थे।

दिनेश त्रिवेदी जो टीएमसी की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानें जाते हैं, उन्होंने जब पार्टी छोड़ी तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से ज्यादा प्रशांत किशोर को लताड़ा है। उन्होंने प्रशांत किशोर की मौजूदगी पर ही अपनी आपत्तियां जाहिर की है। दिनेश त्रिवेदी ने कहा, जो पार्टी संघर्ष से बनी हैउसे चुनाव जिताने के लिए एक कॉरपोरेट इंसान को हायर किया जाता है। यह अपमानजनक है।” त्रिवेदी ने आरोप लगाए कि, टीएमसी के सभी बड़े नेताओं के ट्विटर हैंडल पीके की टीम द्वारा मैनेज किए जाते थे और उस हैंडल से पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री को अपशब्द कहे जाते थे।” उन्होंने बताया कि कैसे एक इंसान पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं को सोशल मीडिया के जरिए अपने कब्जे में रखता है। इतना ही नहीं उन्होंने ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी को भी आड़े हाथों लिया है।

दिनेश त्रिवेदी के निशाने पर हायर किए गए प्रशांत किशोर तो रहे ही हैं, साथ ही अभिषेक बनर्जी को लेकर उन्होंने कहा, अभिषेक बनर्जी को बात करनी नहीं आती है। वो पीएम मोदी के चक्कर में पूरे गुजराती समाज को अनाप-शनाप बोलते रहते हैं।” साफ है कि TMC के संस्थापक सदस्य दिनेश त्रिवेदी पार्टी की बर्बादी का सारा ठीकरा प्रशांत किशोर, अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी पर फोड़ रहे हैं, जो कि किसी हद तक सही भी है।

केवल दिनेश त्रिवेदी ही नहीं, बल्कि बंगाल में अनेक बड़े नेताओं  ने TMC केवल इसीलिए छोड़ी है, क्योंकि वहां पार्टी की गतिविधियों में प्रशांत किशोर जरूरत से ज्यादा दखल दे रहे हैं। TMC छोड़ने वाले नेताओं में शुभेंदु अधिकारी से लेकर सुनील मंडल, वैशाली डालमिया और राजीब बनर्जी समेत अनेकों TMC विधायक भी शामिल हैं। ये सभी TMC के कद्दावर नेता माने जाते रहे हैं लेकिन TMC में प्रशांत किशोर का ज़रूरत से ज़्यादा दखल देना और इन नेताओं के सोशल मीडिया से लेकर प्रत्येक निजी जानकारी रखना इन नेताओं को रास नहीं आया है। पार्टी में स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि अब तो कोई भी नेता ममता से मिलने में अपनी चप्पलें घिस डालता है लेकिन पीके के कारण मुलाकात नहीं हो पाती है, जो नाराजगी की एक अन्य बड़ी वजह है।

प्रशांत किशोर से नाराज़गी के कारण TMC से बाहर जा रहे वरिष्ठ नेता ही अब पार्टी की अंदरूनी पोल खोल रहे हैं। साफ है कि विधानसभा चुनाव में ममता दीदी की हार के पीछे सबसे बड़ी वज़ह टीएमसी के ही चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर होंगे।

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