11वें दौर की वार्ता में गोगरा और हाॅट स्प्रिंग्स पर होगी चर्चा, चीन के रुख में आयी नरमी


लद्दाख।
 भारत और चीन के बीच गलवान में हुई झड़प के बाद रिश्ते तनावपूर्ण हो गये। लद्दाख के पैंगोंग त्सो लेक के बीच सेना पीछे भी हटीं लेकिन अभी पूरी तरह से चीन की सेना पीछे नहीं हटी है। शुक्रवार को कोर कमांडर स्तर की 11वें दौर की वार्ता होगी। बैठक में गोगरा और हॉट स्प्रिंग्स इलाके से सैनिकों की जल्द वापसी पर बातचीत होगी। देपसांग में लंबित मुद्दों के समाधान पर भी जोर दिया जाएगा। भारत-चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की 11वें दौर की वार्ता में भारत की ओर से लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन शामिल होंगे। मेनन 10वें दौर की वार्ता में भी मौजूद थे और उन्हें लद्दाख से जुड़ा अच्छा अनुभव है। लंबी सैन्य और राजनयिक वार्ताओं के बाद फरवरी में पेंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारे से सेनाओं और हथियारों को पूरी तरह हटाने के समझौते पर सहमति बनी थी। सेनाओं के हटाए जाने के बाद कई पर्वतीय इलाके ऐसे हैं, जहां पर अभी भी हालात पहले जैसे हैं। ज्ञात हो कि भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर विवाद पिछले साल मई में शुरू हुआ था। जब चीन ने लद्दाख के अक्साईचीन की गलवान घाटी में भारत की ओर से सड़क निर्माण को लेकर आपत्ति जताई थी।

5 मई को भारतीय सेना और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प होने के बाद सैन्य गतिरोध पैदा हो गया। चीनी सैनिक 9 मई को सिक्किम के नाथू ला में भी भारतीय सैनिकों के साथ उलझ गए थे। इस टकराव में कई सैनिकों को चोटें आई थीं। 15 जून को लद्दाख के गलवान घाटी में भी भारत और चीनी सैनिकों के बीच झड़प हुई, जिसमें 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। चीन ने काफी दिन बाद चार सैनिकों के मारे जाने की जानकारी साझा की।

शुरुआत में चीन के अड़ियल रुख की वजह से बात आगे नहीं बढ़ पा रही थी। भारत की तरफ से हुई कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते दबाव के बाद चीन के रुख में नरमी आयी। दोनों पक्ष पैंगोंग झील क्षेत्र से सैनिकों की वापसी पर सहमत हुए। अभी भी कई इलाकों को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है। कमांडर स्तरीय वार्ता को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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