डोर टू डोर कोरोना वैक्सीन देने की मांग खारिज, HC ने कहा- पब्लिसिटी के लिए दायर की याचिका


नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली में डोर-टू-डोर कोरोना वैक्सीन लगाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है. जस्टिस विपिन सांघी की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि याचिका में दिल्ली में वैक्सीनेशन को लेकर कोई होमवर्क नहीं किया गया है. केवल पब्लिसिटी हासिल करने के लिए याचिका दाखिल की गई है.

वैक्सीन देने की उम्र सीमा हटाने की मांग

याचिका दिल्ली युनिवर्सिटी के लॉ स्टूडेंट मृगांक मिश्रा ने दायर की थी. याचिका में कहा गया था कि राजधानी दिल्ली में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. ऐसे में कोरोना की वैक्सीन सभी को जल्द से जल्द मिले तो बेहतर है. याचिकाकर्ता की ओर से वकील कुशल कुमार ने कहा कि कोरोना के वैक्सीन को लेकर आयु सीमा हटायी जाए. वर्तमान में केवल 45 वर्ष से ज्यादा के उम्र के लोगों को वैक्सीन दी जा रही है, वो भी चुनिंदा सेंटर पर. याचिका में कहा गया था कि जब सरकार लॉकडाउन की किसी भी संभावना से इनकार कर रही है. ऐसे में कोरोना के वैक्सीन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की जरूरत है.

वैक्सीनेशन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की मांग

याचिका में कहा गया था कि दिल्ली, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि कोरोना के वैक्सीन देने के लिए उम्र की सीमा खत्म की जाए, लेकिन केंद्र सरकार ने इस मांग को खारिज कर दिया है. याचिका में कहा गया था कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने भी केंद्र सरकार से कोरोना के वैक्सीन के लिए उम्र सीमा खत्म करने की मांग की है. IMA ने कहा है कि वैक्सिनेशन के लिए निजी सहायता भी ली जाए.

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