जानलेवा कोरोना! दिल्ली में 5 दिन के अंदर 1900 से ज्यादा मौतें


नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली कोरोना के अब तक के सबसे बुरे संक्रमण काल से गुजर रही है. कोरोना के कारण होने वाली मौत के आंकड़े देखें, तो इसकी भयावहता समझी जा सकती है. बीते महज 3 दिनों में ही क्रमशः 448, 338 और 311 मरीजों की मौत हुई है. मौत के आंकड़े किस गति से बढ़ रहे हैं, यह इस बात से समझा जा सकता है कि मई के शुरुआती 5 दिनों में ही आए मौत के आंकड़े बीते करीब 4 महीने के दौरान हुई मौत के आंकड़ों से ज्यादा हैं.

महज 5 दिन में ही 1900 से ज्यादा मौत

1 मई से 5 मई के बीच दिल्ली में कोरोना के कारण कुल 1916 मौत हुई है. वहीं, 1 दिसम्बर 2020 से 1 अप्रैल 2021 के बीच दिल्ली में कोरोना से कुल 1776 मरीजों की मौत हुई थी. यानी अप्रैल तक के बीते 4 महीने में जितनी मौत हुई, उससे ज्यादा लोगों की मौत मई के शुरुआती 5 दिनों में हो चुकी है. आपको बता दें कि मार्च के अंतिम हफ्ते से अप्रैल की शुरुआत के बीच दिल्ली में कोरोना की चौथी लहर की दस्तक हुई थी, उसके बाद से लगातार आंकड़े बढ़ रहे हैं.

एक महीने में बीते साढ़े 5 महीने जितनी मौत

अप्रैल महीना कोरोना के मद्देनजर दिल्ली के लिए सबसे भयावह रहा है. कोरोना के कारण अब तक जितनी मौत हुई है, उनमें से करीब 30 फीसदी लोगों की जान केवल अप्रैल महीने में गई है. 1 अप्रैल को दिल्ली में कोरोना से मौत का कुल आंकड़ा 11,036 था. यह संख्या 30 अप्रैल को 16,147 पर पहुंच गई. यानी राजधानी दिल्ली में महज एक महीने के भीतर ही 5111 लोगों की कोरोना संक्रमण के कारण मौत हो गई.

अप्रैल में हर दिन औसतन 170 मौत

गौर करने वाली बात यह है कि महज एक महीने में हुई मौत का यह आंकड़ा, बीते साढ़े 5 महीने में कोरोना से हुई मौत के आंकड़े जितना है. कोरोना की शुरुआत से 15 अक्टूबर तक दिल्ली में 5924 मरीजों की संक्रमण से मौत हुई थी. यानी 15 अक्टूबर से 1 अप्रैल के बीच 5112 लोग कोरोना से मरे, जबकि केवल अप्रैल महीने में ही 5111 लोगों की मौत हो गई. अप्रैल महीने में कोरोना से औसतन 170 मौत हर दिन हुई है.

'अस्पताल पहुंचने में देरी कर रहे लोग'

अचानक से मौत के मामलों में हुई बढ़ोतरी का कारण जानने के लिए ईटीवी भारत पहुंचा दिल्ली के सबसे बड़े कोरोना अस्पताल लोकनायक अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. सुरेश कुमार के पास. डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि मौत के मामलों में हो रही बढ़ोतरी के दो महत्वपूर्ण कारण है. पहला यह कि लोग अस्पताल पहुंचने में देरी कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि ज्यादातर कोरोना मरीज अस्पतालों में तब आ रहे हैं, जब उनका ऑक्सीजन लेवल बहुत नीचे चला जा रहा है.

'ऑक्सीजन 93 से नीचे आए, तो अस्पताल जाएं'

डॉ. सुरेश कुमार ने कहा कि ऐसे मामलों में ज्यादातर मौतें हो रही हैं. लोगों को चाहिए कि ऑक्सीजन जैसे ही 93 से नीचे आए, वे तुरंत अस्पताल में भर्ती हों. जहां भी बेड मिले एडमिट होना जरूरी है, चाहे वो छोटा अस्पताल या कोई नर्सिंग होम ही क्यों ना हो. डॉ. सुरेश कुमार ने कहा कि मौत के बढ़ते मामलों का दूसरा कारण यह है कि ऐसे लोग भी बड़ी संख्या में संक्रमित हो रहे हैं, जो पहले से गंभीर बीमारियों से ग्रसित हैं, जो डायबिटीज या हार्ट के मरीज हैं.

'गर्भवती महिलाओं में मृत्यु दर ज्यादा'

डॉक्टर सुरेश कुमार ने कहा कि कोरोना संक्रमित हो रहे ऐसे गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. डॉ. सुरेश कुमार ने यह भी बताया कि बताया कि कोरोना संक्रमित हो रहीं गर्भवती महिलाओं की मृत्यु दर भी काफी ज्यादा है. ऐसे में जरूरी है कि गर्भवती महिलाएं अगर संक्रमित हों, तो भले ही उनमें लक्षण ना के बराबर हों, फिर भी वे डॉक्टर की सलाह लें. हालांकि इन दिनों अस्पतालों में बेड्स की भी काफी किल्लत है. ऐसे में लोगों के सामने बड़ी समस्या यह भी है कि अस्पताल में भर्ती कैसे हों.

अगर न मिले अस्पतालों में बेड्स

अस्पतालों में आसानी से बेड्स न मिल पाने के कारण भर्ती होने में हो रही समस्या के बीच लोग कैसे खुद को सुरक्षित करें. इसे लेकर सवाल करने पर डॉ. सुरेश कुमार का कहना था कि अभी के समय में सबसे जरूरी है कि आप अपने ऑक्सीजन का स्तर देखते रहें

इसके लिए हर समय ऑक्सीमीटर साथ होना चाहिए और जैसे ही लगे कि ऑक्सीजन का स्तर नीचे आ रहा है, तुरंत किसी फिजीशियन से सलाह लें. आपको बता दें कि दिल्ली में अब तक कोरोना से 18 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है

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