लॉकडाउन ही थाम सकता है मौत का सिलसिला


हैदराबाद : आप इसे लहर नहीं, सुनामी कहिए... दिल्ली में ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होने पर दिल्ली हाईकोर्ट ने यह सख्त टिप्पणी की है. पिछले साल जनवरी महीने में कोरोना ने दस्तक दी थी. 25 लाख मामला पहुंचते-पहुंचते छह महीने लग गए थे. इस बार एक सप्ताह में 26 लाख मामले दर्ज हो गए. एक सप्ताह में 23,800 लोगों की मौत हो गई. मार्च महीने में 5,417 लोगों की मौत हुई थी, लेकिन अप्रैल में 45 हजार लोगों की मौत होने के सिर्फ सरकारी आंकड़े हैं. उन आंकड़ों को छोड़ दीजिए, जिसकी रिपोर्टिंग की नहीं की गई है.

अब तक दो करोड़ लोगों को भारत में कोरोना हो चुका है. अभी 34 लाख सक्रिय मामले हैं. यह एक बड़े सामाजिक संकट की ओर इशारा कर रहे हैं.

विदेशी एजेंसियों ने भारत में हर दिन 10 लाख मामले की रिपोर्टिंग को लेकर आगाह किया है. उनके अनुसार हर दिन पांच हजार लोगों की मौत हो सकती है. इस चेतावनी के बाद पूरे देश में लॉकडाउन की मांग उठने लगी है. 73 फीसदी मामले महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, प. बंगाल, छत्तीसगढ़ और दिल्ली से आ रहे हैं. यहां के 150 जिलों में तेजी से मामले सामने आ रहे हैं. स्थिति पर नियंत्रण लगाने के लिए लॉकडाउन ही विकल्प बच रहा है.

हरियाणा और ओडिशा ने लॉकडाउन की घोषणा कर दी है. कुछ राज्यों ने कर्फ्यू लगा रखा है. कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं. इसके बावजूद कोरोना के मामले कम नहीं हो रहे हैं. कुछ देशों ने भारत से आने वाले यात्रियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं. ऐसी परिस्थितियों में केंद्र को महामारी की शृंखला तोड़ने के लिए राज्यों की सहमति से लॉकडाउन लागू करने पर विचार करने चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान लॉकडाउन पर विचार करने को लेकर टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि लॉकडाउन के सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभाव पड़ते हैं, इसलिए गरीबों को भूख से बचाने के लिए पहले ही कदम उठा लेने चाहिए. अमेरिकी जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ एंटनी फॉकी ने भारत के स्वास्थ्य और चिकित्सा व्यवस्था को ध्वस्त बताया है. उन्होंने कहा कि भारत को कुछ सप्ताह के लिए लॉकडाउन लगा देने चाहिए. उन्होंने कहा कि चीन की तर्ज पर भारत को अलग से कोविड अस्पताल तेजी से बनाने चाहिए. फॉकी ने कहा कि भारत को ऑक्सीजन, दवा और बेड बढ़ाने पर युद्ध स्तर पर जुट जाना चाहिए.

पीएम ने कोविड टास्क फोर्स की अनुशंसा की है. जरूरत है तो लोगों की जिंदगी बचाने के लिए तुरंत निर्णय किए जाने की. फिक्की ने अनुमान लगाया है कि अगले चार से पांच महीने तक ऐसी ही स्थिति रहने वाली है. उनके अनुसार देश को दो लाख आईसीयू बेड की आवश्यकता है. तीन लाख नर्स और दो लाख जूनियर डॉक्टर की अविलंब जरूरत है.

कोरोना टेस्टिंग और वैक्सीनेशन दोनों की गति बढ़ानी होगी. सीआईआई ने भी लॉकडाउन का प्रपोजल दिया है. केंद्र को राज्यों के साथ सलाह-मशविरा करना चाहिए. प्रवासी मजदूरों की मानवीयता के साथ मदद की जानी चाहिए. तब जाकर कहीं कोरोने से होने वाली सामूहिक मौत का सिलसिला थम सकेगा.

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