कहानी दिल्ली के दर्द की... आख़िरी सफ़र में भी जद्दोज़हद ...कुछ तो करो सरकार ..!


नई दिल्ली: न जाने दिल्लीवासियों का दर्द कब कम होगा...एक तरफ कोरोना से अपने तड़पते परिजन के किसी भी तरह से ईलाज हो जाने का जतन तो दूसरी ओर एक कतार वो जो श्मशान और कब्रिस्तान के बाहर लग रही है...कोरोना के कारण हर दिन सैकड़ों लोग जान गंवा रहे हैं. जिंदगी की जंग लड़ने में महंगा खर्च और मौत के बाद भी अंतिम संस्कार क्रिया में हो रहा भारी भरकम खर्च

न तो दिल्ली सरकार परिजनों की इस पीड़ा को महसूस कर रही है और न ही दिल्ली के नगर निगम इस पहलू की सुध ले रहे हैं । गाजीपुर श्मशान घाट के मुख्य पंडित सुशील ने बताया कि यहां कोरोना विधि से अंतिम संस्कार कराने के लिए 3,100 रुपये की पर्ची कटती है. इसमें लकड़ी और श्मशान घाट का शुल्क शामिल है. इसके अलावा और सभी सामान की व्यवस्था मृतक के परिजन ही करते हैं.

और भी बहुत हैं खर्चे

दिल्ली में कोरोना से हो रही मौतों की वजह से श्मशान घाटों पर जगह की कमी होने लगी है. अंतिम संस्कार के लिए लोगों को नंबर तक लगाने पड़ रहे हैं. गाजीपुर श्मशान घाट के मुख्य पुजारी ने बताया कि कोरोना से मृत इंसानों के अंतिम संस्कार के लिए लोगों को ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं. सबसे पहले 31 सौ रुपये की पर्ची लकड़ी और श्मशान शुल्क के लिए काटी जाती है. इसके अलावा अन्य दाह संस्कार के दौरान उपयोग में आने वाली अन्य सामग्रियों को परिजन ही लेकर आते हैं. इसकी कीमत 3 से लेकर 4 हजार रुपये तक होती है. इसके बाद पीपीई किट की व्यवस्था भी परिजन करते हैं. कोरोना विधि से अंतिम संस्कार के लिए पिपीई किट की अनिवार्यता है, तो ऐसे में 1,500 से 2,000 रुपये तक PPE किट में खर्च होते हैं.

एंबुलेंस की सुविधा देता है श्मशान समिति

पुजारी सुशील का कहना है कि श्मशान समिति के पास कुछ एंबुलेंस हैं, जो शव को लाने का काम करते हैं. इसके लिए 800 रुपये की पर्ची कटती है. अभी के समय सैकड़ों की संख्या में शव श्मशान घाट आ रहे हैं. ऐसे में कई लोग निजी एंबुलेंस के माध्यम से भी परिजनों के शव को श्मशान घाट ला रहे हैं. इसके लिए उन्हें 3 से लेकर 8 हजार रुपये तक की रकम चुकानी पड़ रही है । राजस्थान समेत कई राज्यों में कोरोना से होने वाली मौतें में अंतिम संस्कार का खर्चा राज्य सरकार दे रही है, शव को अस्पताल से अंतिम संस्कार स्थल तक लाने का खर्च भी वहन कर रहे हैं । लेकिन सियासी उलझनों के फेर में लगी सरकार और प्रशासन का ध्यान इस और है ही नहीं दिल्ली का आम आदमी आखिर करे तो क्या करें...न अस्पतालों में ईलाज मयस्सर है और न ही श्मशान,कब्रिस्तान में जगह...उपर से महंगा खर्च दुखियारे परिवार की कमर तोड़ कर रख दे रहा है । दिल्ली वाले कोरोना से जूझते हुए अपनी जीवटता दिखा रहे हैं...मुद्दा सरकार और प्रशासन की सोच का है...क्या अन्य राज्यों की तरह दिल्ली में कोविड मृतकों का अंतिम संस्कार सरकारी खर्च पर नहीं हो सकता ??

close