रामायण में भरत का किरदार, निभाने वाले संजय जोग, जिसे भूल गई दुनिया

 


राम भक्त ले चला रे राम की निशानी…. प्रभु श्री राम के वनवास के बाद जब भरत और राम का संवाद होता है उस वक्त ये गीत सभी को भावविभोर कर जाता है। भरत अपने आंख में आंसू और शीश पर खड़ाऊं लेकर निकल पड़ते हैं।सब जानते है की भरत ने अयोध्या के राजसिंहासन पर राम के स्थान पर कभी न बैठने का संकल्प किया था। भरत ने राम की खड़ाऊ को उनके स्थान पर सजाकर कर राम के अयोध्या लौटने तक अयोध्याका शासन चलाया था

संजय जोग का जन्म 24 सितंबर 1955 को नागपुर में हुआ था। संजय टीवी के मशहूर अभिनेता रहे लेकिन कभी भी अभिनेता नहीं बनना चाहते थे वे तो एयरफोर्स पायलट बनने की चाह रखते थे। लेकिन उनके माता-पिता को ये मंजूर नहीं था। अपने करियर में संजय जोग ने 50 से अधिक फिल्मों में काम किया, जिसमें 30 से ज्यादा फिल्में मराठी भाषा में थीं। कुछ गुजराती और कुछ हिंदी की फिल्में। हिंदी सिनेमा में उन्होंने ‘जिगरवाला’ से डेब्यू किया। इसके बाद उन्हें कई फिल्मों के देखा गया।

रामायण में संजय को पहले ‘लक्ष्मण’ का रोल ऑफर हुआ था लेकिन उन्होंने इसे रिजेक्ट कर दिया था। हालांकि बाद में उन्होंने ‘रामायण’ में खुद से काम करने की इच्छा जताई तो उन्हें ‘भरत’ का किरदार मिला। रामायण के सभी किरदार जैसे अमर हो गए थे भरत का किरदार संजय जोग ने भरत के किरदार में जान डाल दी थी। ‘भरत’ का किरदार निभाने वाले अभिनेता संजय जोग आज हमारे बीच नहीं हैं। ।

संजय जोग रामायण खत्म होने के कुछ साल बाद ने 27 नवंबर 1995 को 40 की उम्र में ही दुनिया को अलविदा कह दिया। उनकी मौत का कारण लीवर फेल होना था। भरत के किरदार से घर-घर में मशहूर हो चुके संजय जोग के फैंस को उनके निधन की खबर ने हिलाकर रख दिया था।

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