जब 536 रनों का पीछा कर रही थी टीम यूसुफ पठान ने दोहरा शतक जड़कर दिला दी थी क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी जीत

 

17 नवंबर 1982 को वडोदरा में पैदा हुए युसूफ पठान एक शानदार भारतीय क्रिकेटर थे, जिन्होंने प्रारूप और मैच की स्थिति की परवाह किए बिना अपने ताबतोड़ अंदाज में ही बल्लेबाजी की है। यही वजह है कि वह घरेलू क्रिकेट में इतने सफल हुए है। उनके इंटरनेशनल करियर की बात करें तो उन्होंने 5 साल तक भारत के लिए खेला है और इन पांच सालों में वो 79 मैच ही खेल पाए है। उन्होंने अपना आखिरी मैच 2012 में 30 साल की उम्र में खेला था। वो जिस तरह के क्रिकेटर थे उस हिसाब से उनका इंटरनेशनल करियर नहीं चला। अपने छोटे से करियर में उन्होंने कई अच्छी पारियां खेलकर दिखाई है। यूसुफ ने पाकिस्तान के खिलाफ 2007 के टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल में अपना डेब्यू किया था।

2016 की शुरुआत तक, यूसुफ पठान के नाम पेशेवर क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में सबसे तेज शतक बनाने का रिकॉर्ड था। फर्स्ट क्लास (2008 में सेंट्रल जोन के खिलाफ 51 गेंद में), लिस्ट ए (2010 में महाराष्ट्र के खिलाफ 40 गेंद) और टी 20 (2010 में मुंबई इंडियंस खिलाफ 37 गेंदों में)। युसूफ के नाम फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 11 शतक दर्ज हैं, जिनमें से सात शतक उन्होंने 100 से कम गेंद खेलते हुए बनाए हैं और केवल एक बार ही शतक लगाने के लिए उन्होंने 125 से अधिक गेंदें खेली थीं। यही वजह है कि फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका स्ट्राइक रेट 85.99 का है।

राजस्थान रॉयल्स की तरफ से खेलते हुए उन्होंने 37 गेंद में मुंबई इंडियंस के खिलाफ शतक जड़ दिया था। शतक जड़ने के ठीक एक महीने बाद उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी में वडोदरा की और से महाराष्ट्र के खिलाफ 42 गेंद में 108 रन ठोक दिए थे। उनकी इस पारी की मदद से वडोदरा ने 36.3 ओवर में ही मैच अपने नाम कर लिया। अपनी इस धुंआधार पारी में उन्होंने 10 छक्के जड़े। युसूफ का ये शतक दूसरा सबसे तेज शतक है। उनसे तेज शतक शाहिद अफरीदी ने 1996 में श्रीलंका के खिलाफ लगाया था।

इस रिकॉर्ड शतक से कुछ हफ्ते पहले, यूसुफ पठान ने 2009-10 में दलीप ट्रॉफी के फाइनल में वेस्ट जोन की जीत में अहम भूमिका निभाई। उस फाइनल मैच में साउथ जोन ने पहली पारी में कप्तान दिनेश कार्तिक के 183 रन की पारी की बदौलत 400 रन बनाए। जवाब में युसूफ पठान की 76 गेंदों में 108 रन की बेहतरीन पारी की बदौलत वेस्ट जोन 251 रन बना पाई। दूसरी पारी में दिनेश कार्तिक का बल्ला फिर चला और उन्होंने 150 रन की पारी खेली और उनकी इस पारी की वजह से साउथ जोन ने वेस्ट जोन को 536 रन का लक्ष्य दिया जो उसे दो दिनों से भी कम वक्त में बनाना था। चौथे दिन का खेल खत्म होने तक वेस्ट जोन ने 6 विकेट खोकर 379 रन बना लिए थे और युसूफ 84 रन बनाकर खेल रहे थे। पांचवें और आखिरी दिन उन्होंने अलग ही रूप अपनाया। यूसुफ ने 190 गेंद में 210 रन की नाबाद पारी खेली और इस दौरान उन्होंने 19 चौके और 10 छक्के लगाए।

युसूफ पठान के बल्ले से इस साल आग उगली । उन्होंने लिस्ट ए और टी 20 प्रारूपों में रिकॉर्ड शतक भी लगाए हैं। उन्होंने वनडे में दो शतक लगाए जिसमें पहला शतक न्यूजीलैंड के खिलाफ आया जब भारतीय टीम को 316 रन के लक्ष्य का पीछा करना था। वो बल्लेबाजी करने तब आए जब भारत 108 रन पर 19.3 ओवर में 4 विकेट खो चुका था। युसूफ ने उस मैच में 96 गेंद में 123 रन की पारी खेलते हुए टीम को 5 विकेट से जीत दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई। उन्होंने उस मैच में 7 चौके और 7 छक्के लगाए।

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हुए वनडे मुकाबले में भारत को 46 ओवर में 268 रन का लक्ष्य मिला था, लेकिन महज 60 रन पर टीम ने 5 विकेट खो दिए।  पठान ने उस मैच में फिर संभलकर खेलते हुए 47 गेंद में अपना अर्धशतक जड़ा। अगले पचास रन उन्होंने 21 गेंद में बना दिए। उन्होंने 68 गेंद में अपना दूसरा शतक लगाया। उस मैच में उन्होंने 70 गेंद में 105 रन की पारी खेली और इस दौरान 8 चौके और 8 छक्के लगाए।

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